
धर्मेंद्र रस्तोगी/छपरा (सारण) के लाल नीरज कुमार सिंह ने कठिन संघर्षों और उपेक्षाओं को पीछे छोड़ते हुए वैश्विक पटल पर भारत का मान बढ़ाया है। अमेरिका की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी ऑफ मैसाचुसेट्स लोवेल में उन्होंने 24 अगस्त 2026 से ‘एजुकेशन लीडरशिप’ विषय में पीएचडी (PhD) की शुरुआत कर दी है। सबसे खास बात यह है कि इस प्रतिष्ठित 2026 बैच के लिए भारत से चुने जाने वाले वह इकलौते शोधार्थी हैं।
2.6 करोड़ की फुल-फंडेड स्कॉलरशिप
नीरज को यूनिवर्सिटी की तरफ से कुल 2.6 करोड़ रुपये की पूरी तरह फंडेड स्कॉलरशिप मिली है। इस स्कॉलरशिप में उनकी पूरी ट्यूशन फीस माफ होने के साथ-साथ हेल्थ इंश्योरेंस और नियमित छात्रवृत्ति भी शामिल है, जिससे उनके रहने-खाने और शोध का सारा खर्च सुरक्षित हो गया है।
अमेरिकी युवाओं को पढ़ाने की जिम्मेदारी
नीरज केवल शोध तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अपनी असाधारण योग्यता के दम पर उन्हें अमेरिकी यूनिवर्सिटी में शिक्षक की भूमिका भी मिली है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए उन्हें ‘टीचिंग असिस्टेंट’ नियुक्त किया गया है, जहां वे ग्रेजुएशन और पोस्ट-ग्रेजुएशन के विद्यार्थियों की अकादमिक राह को आसान बनाएंगे। विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ एजुकेशन ने उन्हें विशेष रिसर्च वर्कस्पेस भी प्रदान किया है।
समावेशी और बहुभाषी शिक्षा पर शोध
उनका शोध ‘बहुभाषी शिक्षा, शिक्षा में बराबरी और समावेशी शिक्षा’ जैसे गंभीर और महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दों पर आधारित है। वे एक ऐसे शैक्षिक मॉडल की परिकल्पना पर काम कर रहे हैं, जहां भाषा या सामाजिक पृष्ठभूमि के कारण कोई भी बच्चा पीछे न छूटे।
ऐसी रही है शैक्षणिक यात्रा
प्रोफेसर बनने का सपना देखने वाले नीरज ने इस मुकाम तक पहुंचने से पहले कई प्रतिष्ठित संस्थानों से शिक्षा प्राप्त की है:
- यूनिवर्सिटी ऑफ पेनसिल्वेनिया (UPenn), अमेरिका
- टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान (TISS), मुंबई
- राजीव गांधी राष्ट्रीय युवा विकास संस्थान (RGNIYD), चेन्नई
- जय प्रकाश विश्वविद्यालय (JPU), छपरा
अपनों के तानों और विपरीत परिस्थितियों को अपनी ताकत बनाकर अमेरिका तक का सफर तय करने वाले नीरज आज करोड़ों युवाओं के लिए एक प्रेरणा स्रोत बन चुके हैं।




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