आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में ऊंचाई, वजन और बीएमआई की जांच शुरू, एनसीडी पोर्टल पर रियल- टाइम दर्ज हो रहे आंकड़े:

छपरा, 30 सितंबर।
गैर- संचारी रोगों (एनसीडी) की समय पर पहचान और उपचार सुनिश्चित करने के लिए जिले में ‘जांच एवं उपचार, चिकित्सा आपके द्वार’ विशेष अभियान को गति मिल रही है। सदर प्रखंड अंतर्गत शेरपुर गांव स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर (आम) की सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) स्वाति ने बताया कि इस अभियान के तहत स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र में 30 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की स्वास्थ्य जांच की जा रही है। जिसमें लोगों की ऊंचाई, वजन और बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) की जांच की गई। जांच के दौरान सामने आने वाले आंकड़ों को एनसीडी पोर्टल पर रियल- टाइम दर्ज किया जा रहा है, ताकि संदिग्ध मरीजों की पहचान कर उन्हें आगे की जांच और उपचार से जोड़ा जा सके। हालांकि स्वास्थ्य विभाग का जोर अब केवल बीमारी का इलाज करने तक सीमित नहीं है, बल्कि बीमारी की शुरुआती अवस्था में ही उसकी पहचान और प्रबंधन पर है। विशेष रूप से मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग सहित अन्य गैर-संचारी रोगों के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए 30 वर्ष से अधिक आयु के लोगों की नियमित स्क्रीनिंग को अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है।

आयुष्मान आरोग्य मंदिर में इलाज़ कराने आए शेरपुर गांव निवासी 72 वर्षीय राम नारायण सिंह, 97 वर्षीय राज दुलारी कुंवर सहित 47 वर्षीय जितेंद्र सिंह और 55 वर्षीय चंपा राय जैसे उम्र दराज मरीज़ों का कहना है कि गांव में जब हर तरह की स्वास्थ्य सुविधाएं मिल रही है तो फिर सदर प्रखंड मुख्यालय स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र या सदर अस्पताल जाने की क्या जरूरत है। हालांकि स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य संस्थान के चिकित्सा पदाधिकारी सहित अन्य स्वास्थ्य कर्मियों के द्वारा गांव में घूम घूम कर उच्च रक्तचाप, मधुमेह, टीकाकरण या अन्य प्रकार की स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराई जा रही है।

जिला गैर- संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. भूपेंद्र कुमार ने बताया कि सारण जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को जमीनी स्तर पर अधिक प्रभावी, सुलभ और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से यह व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार के दिशा – निर्देश के अनुसार 01 सितंबर से 30 नवंबर 2026 तक चलने वाले अभियान के माध्यम से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में समुदाय स्तर तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाई जा रही है। हालांकि इस अभियान के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा लोगों को गैर- संचारी रोगों के जोखिम और बचाव के प्रति जागरूक करने के साथ आवश्यक जांच के लिए प्रेरित किया जा रहा है। जांच में किसी प्रकार की असामान्यता सामने आने पर संबंधित व्यक्ति को चिकित्सकीय परामर्श और आवश्यक उपचार के लिए आगे भेजने की व्यवस्था की गई है। क्योंकि स्वास्थ्य विभाग का उद्देश्य है कि नियमित जांच और समय पर उपचार के माध्यम से गैर- संचारी रोगों के गंभीर परिणामों को कम किया जा सके और लोगों को ‘इलाज के लिए अस्पताल पहुंचने’ के बजाय ‘बीमारी की पहचान घर के करीब ही होने’ की सुविधा मिल सके।