छपरा : भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन बुधवार को छपरा सदर प्रखंड मुख्यालय पर जनता की अति-आवश्यक व बुनियादी समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर एक दिवसीय धरना किया गया। इस दौरान भाकपा-माले का एक प्रतिनिधिमंडल प्रखंड विकास पदाधिकारी सह अंचल पदाधिकारी को 7 सूत्री मांग पत्र सौंपा। धरना प्रदर्शन के माध्यम से सरकार एवं स्थानीय प्रशासन के समक्ष रखी गई मांगो में भूमिहीन गरीबों को वास भूमि: सभी भूमिहीन गरीबों को 5 डिसमिल जमीन देने तथा जो गरीब जहां बसे हैं, उन्हें तत्काल वासगीत पर्चा निर्गत करने की गारंटी की जाए।
राशन कार्ड में सुधार व नियमित वितरण: राशन कार्ड से वंचित व काटे गए गरीबों का नाम अविलंब जोड़ा जाए तथा निर्धारित वजन और नियत समय पर राशन वितरण सुनिश्चित किया जाए।
सामाजिक सुरक्षा पेंशन में वृद्धि: छूटे हुए वृद्धों, विधवाओं और दिव्यांगों को पेंशन योजना में शामिल किया जाए, प्रतिमाह नियमित पेंशन का भुगतान हो तथा पेंशन राशि बढ़ाकर ₹3,000 मासिक की जाए।
प्रधानमंत्री आवास योजना से वंचित सभी गरीब परिवारों को पक्का मकान मुहैया कराया जाए।
वोटर लिस्ट में नाम सुधार: बड़े पैमाने पर गरीबों के नाम मतदाता सूची से काटे गए या छूटे हैं, उसकी जांच कर तुरंत नाम जोड़ने की प्रक्रिया पूरी की जाए।
सड़क व आवागमन की समस्या: छपरा सदर प्रखंड के खलपुरा, मेहिया, रौजा पोखरा सहित विभिन्न गरीब मोहल्लों में पक्की सड़क न होने से बीमारी और शादी-ब्याह के समय होने वाली भारी परेशानी को देखते हुए तुरंत सड़क निर्माण कराया जाए।
मला गांव का सौंदर्यकरण व बुनियादी विकास: मला गांव स्थित पोखरे का सौंदर्यकरण, छठ घाट, नाला एवं पक्की सड़क का निर्माण जल्द से जल्द शुरू किया जाए आदि शामिल थी।

भाकपा-माले (सारण ) जिला सचिव कॉमरेड हँसनाथ राम ने कहा सारण जिले और छपरा सदर प्रखंड के गरीब मोहल्लों में फैली बदहाली, राशन-पेंशन में धांधली और बेदखली के सवालों पर राज्य की भाजपा-जदयू नीत सरकार और स्थानीय प्रशासन को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार ‘विकास’ के ढोल पीट रही है, वहीं दूसरी ओर समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े भूमिहीन, दलित और गरीब परिवार बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं।
भाजपा और उसकी सहयोगी सरकारें केवल अमीरों और पूंजीपतियों के हित में काम कर रही हैं। गरीबों के राशन, मकान, पेंशन और मताधिकार पर डाका डाला जा रहा है। यदि जिला प्रशासन और सरकार ने हमारी इन न्यायसंगत मांगों पर त्वरित कार्रवाई नहीं की, तो भाकपा-माले गरीबों, मजदूरों और युवाओं को लामबंद कर सड़कों पर जोरदार जन-आंदोलन खड़ा करेगी।”

आइसा जिला अध्यक्ष कुणाल कौशिक ने कहा
गाँव की मुख्य सड़क पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। जगह-जगह गड्ढे बन जाने के कारण दुर्घटनाओं की आशंका हर समय बनी रहती है। स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बारिश के मौसम में यह सड़क दलदल में तब्दील हो जाती है, जिससे गाँव का संपर्क आसपास के क्षेत्रों से कट जाता है। माला गाँव का ऐतिहासिक पोखर, जो कभी जल संरक्षण और ग्रामीणों की दैनिक जरूरतों का मुख्य स्रोत हुआ करता था, आज देखरेख के अभाव में गंदगी का शिकार है। पोखर में अतिक्रमण और गाद जम जाने से जल स्तर घट रहा है और पानी दूषित हो गया है।

गाँव का ऐतिहासिक पोखर, जो कभी जल संरक्षण और ग्रामीणों की दैनिक जरूरतों का मुख्य स्रोत हुआ करता था, आज देखरेख के अभाव में गंदगी का शिकार है। पोखर में अतिक्रमण और गाद जम जाने से जल स्तर घट रहा है और पानी दूषित हो गया है।
जल संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और गाँव की स्वच्छता को ध्यान में रखते हुए इस पोखर का तत्काल सौंदर्यकरण, जीर्णोद्धार और नवीनीकरण कराया जाए। पोखर की गाद निकालकर इसे स्वच्छ जल स्रोत के रूप में पुनर्जीवित किया जाए ताकि भू-जल स्तर भी बेहतर हो सके।

हम जिला प्रशासन और संबंधित विभागीय अधिकारियों से अपील करते हैं कि उपर्युक्त तीनों मांगों पर तत्काल संज्ञान लेते हुए कार्य योजना शुरू की जाए। यदि प्रशासन जल्द से जल्द इन जनसमस्याओं का समाधान नहीं करता है, तो (आइसा) भाकपा माले ग्रामीणों और युवाओं को लामबंद कर चरणबद्ध आंदोलन और धरना-प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की होगी।
कार्यक्रम में भाकपा माले जिला कमिटी मेंबर कामरेड बिजेन्दर मिश्रा , आइसा जिला सचिव विकाश कुमार , राजलक्ष्मी , अखिलेश , हिमांशु , नीरज उपस्थित रहे ।