सीवान :एसडीओ के आदेश पर पैमाईश कराने गये डीसीएलआर को ग्रामीणों ने रोका
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मामला पचरुखी के चीनी मिल की जमीन का
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दैनिक खोज-खबर के लिए पचरूखी से उमेश सिंह पटेल
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पचरूखी :- प्रखंड के एकमात्र चीनी मिल की जमीन का विवाद एक बार पुनः तूल पकड़ने लगा है।दरअसल जब से ग्रामीणों ने विगत दो दिनों में अधिकारियों और भू-माफियाओं की गलबहियां को देखा है।लोग अनहोनी की आशंका से आक्रोशित होकर गोलबंद  होने लगे थे।लोगों की आशंकाएं भी निराधार नहीं थी।इसकी परिणति बुधवार को देखने को मिली।जब प्रशासन भू-माफियाओं के प्रभाव में आकर जबरन भूमि की पैमाइश कराने लगा।इससे गुस्साए लोगों ने सैकड़ो की संख्या में आकर पैमाइश को रोक दिया।
पचरूखी सीओ की कार्यशैली सवालों के घेरे में
चाहे वह नथनपुरा गांव में बरसाती नदी की पेटी की गैर-मजरूआ भूमि की बंदोबस्ती का मामला हो ,या जसौली गांव में अंचल की मिलीभगत से नहर में घर बनाने का मामला,या अब पचरूखी की चीनी मिल की जमीन का मामला सबमें पचरूखी सीओ की भूमिका संदेहास्पद है।आखिर क्या कारण है कि गैर-मजरुआ जमीन की भी खरीद-बिक्री हो रही है।किसानों की कीमती जमीन पर बनें चीनी मिल की जमीन को औने-पौने दाम पर नीलाम करा दिया गया और सही प्रतिवेदन नहीं दिया गया।
जमीन की लूट-खसोट में भी सभी शामिल
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 बड़हरिया विधान सभा के पूर्व प्रत्याशी उमेश कुमार का कहना है कि मिल की जमीन की नीलामी पूर्णतः गलत है।श्री कुमार बताते हैं कि उक्त भूमि का भू-अर्जन बिहार सरकार द्वारा सार्वजनिक हित में वर्ष 1950 ईo में किया गया।चीनी मिल को उक्त जमीन किसानों ने इस शर्त के साथ दिया था कि सरकार जब चाहे कम्पनी को समाहर्ता द्वारा निर्धारित मुआवजे का भुगतान कर जमीन वापस ले सकती है।यदि कम्पनी को भूमि की आवश्यकता नहीं होगी तो कम्पनी मुआबजे में दी गई राशि को वापस लेकर उक्त जमीन मूल भू-धारियों को सौंप देगी।इस प्रकार उक्त भूमि पर कंपनी का अधिकार केवल चीनी मिल चलाने तक ही सिमित था।मिल बंद होने की स्थिति में उक्त जमीन या तो सरकार के कब्जे में चली जानी थी अथवा मूल भू धारियों को लौटा दी जानी थी।लेकिन इन सभी बातों को नजरअंदाज करते हुए कम्पनी ने उक्त भूमि को बैंक के पास बंधक रखकर लोन ले लिया तथा लोन चुकाने में असफल होने पर बैंक द्वारा जमीन की नीलामी कराई गई।अब उक्त भूमि निजी हाथों में जा रही है ,जो बिहार सरकार एवं पचरुखी व जसौली के किसानों के साथ धोखाधड़ी है।इस संबंध में उमेश कुमार ने माननीय पटना उच्च न्यायालय में 23 जनवरी 2017 को एक रीट याचिका दायर किया है जिसका टोकन नम्बर 5481/17 है।श्री कुमार ने पटना उच्च न्यायालय में दायर रिट के सम्बन्ध में स्थानीय प्रशासन को लिखित सूचना भी दिया है।फिर भी बिना इसमें जजमेंट आए ही पैमाईश कराकर भू माफियाओं को जमीन देने को तुली है।