सारण :बारह दिवसीय दशमहाविधा रूपांतरण महायज्ञ के लिए जलभरी मे निकली कलश यात्रा 
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⏩हाथी घोड़े बैंड बाजे एवं झाँकीयों के साथ भव्य कलश यात्रा निकाली गयी 
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✍दिग्विजय सिंह बबलू की रिपोर्ट 
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डोरीगंज /सारण 
छपरा पटना मुख्यमार्ग स्थित घेघटा गाँव के जिन्न बाबा स्थल के समीप आयोजित 12 दिवसीय दशमहाविद्या रूपांतरण महायज्ञ को ले श्रद्धालु नर नारियो के द्वारा हाथी घोड़े व बैण्ड बाजे के साथ गुरूवार को भव्य जलभरी कलश यात्रा निकाली गई ।जिसको लेकर कलशधारियो के बीच श्रद्धा व  भक्ति से ओतप्रोत उत्साहपूर्ण माहौल देखा गया रंग बिरंगे परिधानो से सुसज्जित श्रद्धालु अहले सुबह से ही यज्ञस्थल परिसर मे एकत्रित होने लगे ।जहाँ हाथो मे कलश धारण कर श्रद्धालुओ के द्वारा इस यात्रा का शुभारंभ सुबह 9 बजे से किया गया।
  इस दौरान अश्वजड़ित रथ पर राम और सीता की जीवंत झाँकी के साथ नारे लगाते छपरा पटना मुख्यमार्ग से होकर शिवनगरी रौजा घेघटा आदि गाँवो की सीमाओ का परिभ्रमण करते हुए श्रद्धालु शेरपुर गंगा तट स्थित रामजानकी मठ घाट पहुँचे ।जहाँ मौजूद  श्री धाम काशी से पधारे प्रधान यज्ञाचार्य आशीष पाण्डेय प्रधान वैदिक रजनीश पाण्डेय उदय प्रताप तिवारी पंडित वेदप्रकाश मिश्रा राहुल चौबे तथा संतोष दुबे आदि के द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संगम की जलधारा से मँगाए गए जल से जलभरी क्रिया सम्पन्न कर श्रद्धालुओ के द्वारा पुनः यज्ञस्थल पहुँच  मण्डप की परिक्रमा कर  कलश स्थापित किया गया।
इस दौरान आयोजन समिति के चन्देश्वर ठाकूर सरयुग राय विनोद राय कृष्णा सिह त्रृषि सिह योगेन्द्र सिह राजन सिह कन्हैया सिह तथा गुडू सिह आदि सदस्य जगह जगह कलशधारियो की सुरक्षा मे चौकस नजर आए। इस मौके पर सदस्यो ने बताया कि विविध यज्ञानुष्ठानो के मुकाबले इस महायज्ञ को ले पूरी निष्ठा व पवित्रता के साथ सावधानी बरती जा रही है ।कारण यह दशमहाशक्तियो की अधिष्ठात्री महादेवियो के विविध स्वरूपो का अनुष्ठान है ।जिसके लिए दशमहादेवियो की विशाल प्रतिमाओ के साथ कुल 46 देव प्रतिमाओ का भी निर्माण कराया गया है ।जो इस महायज्ञ मे लोगो के बीच अपने तरह के खास और एक अनूठा आकर्षण का केन्द्र है।
सदस्यो के मुताबिक 12 दिवसीय इस महानुष्ठान के यज्ञकर्ता 1008 योगाधीश्वर संत श्री शिवरंजन स्वामी जी महाराज है ।जिनके नेतृत्व मे इस महायज्ञ का आयोजन किया गया है ।जिसमे वृदांवन से आए कलाकारो के द्वारा प्रतिदिन रात्रि मे कृष्णलीला के साथ साथ सांध्य वेला मे प्रख्यात कथावाचको एवं संतो के द्वारा कथा प्रवचन तथा अनवरत भण्डारे का कार्यक्रम भी जारी रहेगा।