मुल्यांकन को लेकर प्रशासन की बेचैनी बढी वही शिक्षको का प्रदर्शन जारी रहा 
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बरुणेश आनन्द बरुण की रिपोर्ट 

सीवान – बिहार राज्य की शिक्षा ब्यवस्था जहां नकल व टॉपर घोटाले को लेकर विश्व स्तर पर सुर्खियो में बनी रही वही एक बार फिर मुल्यांकन को लेकर कुछ नयी कृतिमान स्थापित करने को तैयार दिख रही है  ज्ञात हो  पिछले साल  की परीक्षा का मुल्यांकन  करा आज तक पारिश्रमिक का भुगतान नही होने के कारण सभी शिक्षकों ने मुल्यांकन कार्य में विगत 15 मार्च से असहयोग करते हुवे स्थगित रखा ।सरकारी तंत्र ने दमनात्मक कार्रवाई की बात करते हुए मुल्यांकन नहीं करने की स्थित में प्राथमिकी दर्ज कराई जाने का अंदेशा जताया बावजूद इसके अठाईसवे दिन भी  मुल्यांकन बाधित रहा  मंगलवार को समुचा जिला सरकारी तंत्र मुल्यांकन के लिए कमर कसे दिखा मगर शिक्षको की चट्टानी एकता के आगे उनकी एक न चली ऐसे में अंदेशा लगाया जा रहा है कि सरकार ससमय परीक्षा परिणाम घोषित करने को लेकर कोई अन्य रास्ते की तलाश करे मगर वह स्थिति और भी भयावह हो सकती है फिलहाल सूबे के बच्चे एक बार फिर अपने को ठगे महसूस कर रहे हैं वही शिक्षक वर्ग का कहना है कि हमे विश्वास में लेकर शिक्षण सहित अन्य कार्यो को कराया जाता है और सबसे ज्यादा शोषण हमारी ही बिरादरी की होती है इसबार  का असहयोग आंदोलन अपनी हक लेकर रहेगा अगर सरकार हमारी बाते नहीं सुनती है तो आने वाले कल में हर सरकारी गतिविधि का विरोध किया जा सकता है बच्चो के भविष्य के बारे में पूछे जाने पर शिक्षको ने इसकी पूरी जिम्मेवारी सूबे की वर्तमान  सरकार पर डाल दी वित्त रहित शिक्षकों ने कहा कि सरकार  धोखेबाजी कर रही है और छात्रों के साथ-साथ शिक्षकों के जीवन से भी खिलवाड़ कर रही है जिसने जीवन का अंतिम पडाव यो ही भूखे रह देख लिया उसे अब मौत का क्या खौफ जिसे सरकार नंगे बदन देखती रही है उसे नंगा विदा करने की अंतिम हश्र भी पुरा करले अब हमारे लिए शेष ही क्या है ? मगर आनेवाली पीढी के लिए यह दशा व समायोजन व नियोजन की कालिख को अब नहीं रहने देंगे हमसबने  तब तक इस प्रक्रिया को बाधित रखने का संकल्प लिया है जब तक सरकार  हमारी मांगे नहीं मानती है।