बाढ़ की आशंका से घिरा तुलसीपुर ऐरई गांव
ए.के केशकर
खागा-फतेहपुर 28 जून। धाता थानाक्षेत्र के तुलसीपुर ऐरई व आस-पास के गांवों में यमुना नदी में उफान से पहले ही बाढ़ की आशंकाओं से ग्रामीण घिरे हुए हैं।
ऐरई मौरंग घाट में मशीनों से होते खनन को लेकर ग्रामीणों में भारी रोष है। बुधवार सुबह खनन में लगी पोकलैंड मशीनों को रोंकने के लिए दर्जनों की संख्या में ग्रामीण पहुंचे। हलांकि पुलिस ने सभी को डपटकर वहां से भगा दिया।
तुलसीपुर ऐरई गांव में वर्ष 1989 में ग्रामीणों को भीषण बाढ़ का सामना करना पड़ा था। गांव के रहने वाले बुजुर्गों की मानें तो आधा से अधिक गांव यमुना नदी की बाढ़ में बह गया था। ग्रामीणों का कहना है मौजूदा समय में जिस जगह पर मौरंग का खनन गांव किनारे हो रहा है, यमुना नदी की बाढ़ में नुकसान होना तय है। गांव के रहने वाले रत्नेश मिश्र एडवोकेट का कहना था रई एहतमाली गाटा संख्या 39 व 41 में जिला प्रशासन ने मौरंग खनन पर बाढ़ के बाद से रोंक लगा दी थी। ग्रामीणों का आरोप है कि एक बार पुन: उसी जगह 10 से अधिक पोकलैंड मशीनों की मदद से मौरंग खनन हो रहा है। जिसमे आबादी को बाढ़ से नुकसान होने की प्रबल संभावना है। ग्रामीणों का कहना है धाता पुलिस तथा तहसील प्रशासन के अधिकारी मौरंग खनन व मशीनों के प्रयोग पर रोंक लगाने में अक्षम साबित हो रहे हैं। तुलसीपुर ऐरई, दामपुर, रानीपुर आदि यमुना तटवर्ती गांवों के लोगों में पुलिस-प्रशासन की भूमिका को लेकर जबरदस्त आक्रोश व्याप्त है।