निजी अस्पताल हैं या कसाई खाने
एक प्रसूता की संदिग्ध मौत के बाद परिजनों ने करवाया पुलिस में मामला दर्ज
नोखा के सुराणा नर्सिंग होम पर लापरवाही बरतने का संगीन आरोप
भैरू सिंह राजपुरोहित ब्यूरो चीफ – बीकानेर
बीकानेर/नोखा 28 जून। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि पूरे बीकानेर अंचल में ही चिकित्सा व्यवस्था का समूचा भट्टा बैठ गया है। आलीशान फाइव स्टार होटलों को मात करते लकदक निजी चिकित्सालय दरअसल कसाईखाने बन गये हैं जहां अधकचरे ज्ञान वाले कसाई नुमा चिकित्सक मौत बांट रहे हैं और उन पर किसी तरह की कोई कार्यवाही नहीं हो रही। नोखा के सुराणा नर्सिंग होम में 14 जून को प्रसव के लिए भर्ती एक प्रसूता की अचानक संदिग्ध हालात में तबियत बिगडऩे एवं कथित लापरवाही से उसकी जान चले जाने से क्षुब्ध परिजनों ने नोखा थाने में मामला दर्ज कराया है।
नोखा पुलिस थाना से प्राप्त जानकारी के अनुसार नोखा के रहने वाले सुमित कुमार हीरावत ने 27 जून को मामला दर्ज करवाया जिसमें बताया गया कि सुमित कुमार की पत्नी मीरा हीरावत को प्रसव के लिए जाँच हेतु 14 जून को सुराणा नर्सिंग होम में ले गये। वहां डॉ वंदना मित्तल व डॉ अनिल सुराणा ने प्रसूता की जांच कर सब कुछ नॉर्मल बताया तथा उन्हें प्रसव के लिए एडमिट कर लिया।
सुमित हिरावत ने रिपोर्ट में लिखवाया है कि 12:30 बजे के आसपास परिजनों ने प्रसव के बारे में पूछा तब 4 बजे डॉ अनिल ने कहा कि प्रसव सीजेरियन करना होगा क्योंकि बीपी ज्यादा है। मीरा को 4:30 बजे के लगभग ऑपरेशन थियेटर ले जाया गया और 5:15 बजे सीजेरियन से पुत्र होना बताया गया तथा कहा गया कि जच्चा बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। 6 बजे प्रसूता मीरा ने परिजनों से कहा कि उसे कमर व छाती में दर्द हो रहा है। नर्सिंग होम के कर्मचारियों को बताने पर उन्होंने बहुत हलके में लेते हुए कह दिया कि सीजेरियन में थोड़ा बहुत दर्द होता ही है।
पुलिस रिपोर्ट में लिखवाया गया है कि मीरा को दर्द बढ़ता गया लेकिन बार बार कहने पर भी सुराणा नर्सिंग होम की नर्सेज कर्मचारियों ने कोई गौर नहीं किया। मीरा की सास एवं देवर नवीन ने बार बार प्रसूता को देखने के लिए कहा तो अभद्र व्यवहार करते हुए उन्हें धक्के देकर बाहर निकाल दिया गया।
सुमित हिरावत के अनुसार थोड़ी देर में मीरा को सांस लेने में दिक्कत होने लगी। पता चला कि मीरा को सांस के लिए जो ऑक्सीजन सिलैण्डर लगा था वह खाली हो गया था। नर्सिंग होम के कर्मचारियों ने बेहद ढीलेपन का परिचय देते हुए नया सिलेण्डर लगाने में 15.20 मिनट लगा दिये। तब तक डॉ अनिल सुराणा को नर्सिंग होम ने बुला लिया। उन्होंने आते ही मीरा को सोनोग्राफी के लिये ले गये और फिर फटाफट 12:30 बजे स्वयं ही ऐंबुलेंस बुलाकर कहा कि मीरा को तो बीकानेर ले जाना होगा।
परिजनों के होश उड़ गये कि पहले सब कुछ सही था फिर एकाएक बीकानेर ले जाने की क्या जरूरत पड़ गई लेकिन बार बार पूछने पर भी नर्सिंग होम वालों ने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। सुमित हीरावत की रिपोर्ट के मुताबिक 2 बजे पीबीएम लाकर मीरा को एडमिट कर लिया गया एवं लेबर रूम ले जाया गया लेकिन तब तक प्रसूता की हालत चिंताजनक लग रही थी। थोड़ी देर बाद मीरा को वेंटीलेटर पर ले लिया गया और परिजनों को कह दिया गया कि 50.50 चाँस हैं। आरोप है कि परिजनों को कुछ भी साफ नहीं बताया गया एवं गुमराह करते रहे। थोड़ी देर बाद डॉ गौरी ने रूटीन चैक अप के बाद कह दिया कि मीरा अब नहीं रही, 9:30 बजे हमें शव ले जाने के लिए कह दिया गया।
मीरा के दुखी परिजनों ने सुराणा नर्सिंग होम के खिलाफ भादसं की धारा 341ए ,323ए ,304 ए के तहत मामला दर्ज करवाया जिसमें माँग की गई कि सुराणा नर्सिंग होम की मीरा से संबंधित सभी जांचें दिलवाई जाएं।
◆ याद हो आई सीमा की मौत
गौरतलब है कि अभी कुछ ही दिन पूर्व बीकानेर के श्रीराम अस्पताल में एक विवाहिता सीमा खत्री की पीबीएम के चिकित्सक डॉ आर के काजला ने कथित तौर पर लापरवाही से इलाज किया एवं हालात बिगडऩे पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए पीबीएम के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती करवा दिया जहां सीमा की मृत्यु हो गई और उनके दो छोटे छोटे मासूम बच्चे आज तक बिलख बिलख कर अपनी माँ को याद कर रहे हैं। हैरत की बात तो यह है कि पंजाबी महासभा सिर पटक कर रह गई कलेक्ट्रेट पर धरना प्रदर्शन कर लिया कलेक्टर सहित तमाम बड़े अफसरों को अपनी व्यथा बता दी लेकिन मजाल है कि डॉ काजला या श्रीराम अस्पताल का बाल भी बांका नहीं हुआ । कारण सिर्फ इतना है कि ये चाँदी का जूता पहनते हैं और वक्त पडऩे पर उस चाँदी के जूते को मारना भी जानते हैं। ऐसा भी नहीं कि श्रीराम अस्पताल या डॉ काजला के खिलाफ सबूत नहीं हैं सबूत हैं और इतने हैं कि किसी और देश में इनके आधार पर अस्पताल को बोरिया बिस्तर समेटना पड़ जाए और डॉ को डिग्री गंवाने की नौबत आ जाए लेकिन ये भारत है जहां आज भी काले अंग्रेज़ों का शासन है जनता की तकदीर में सिर्फ लुटना पिटना और रोना ही लिखा है और आन्दोलन करने वाले भी थक जाते है यहा सेटिंग कर लेते हैं और दुखी परिजन मु ताकता अपने दुखों पर रोने के अलावा कर क्या सकता है ।




Recent Comments