धाता:एक जुलाई से शुरू होगा स्कूल चलो अभियान
क्रासर :-59 छात्रो के बीच एक प्रधानाध्यापक तथा एक सहायक रखे जाने की व्यवस्था
क्रासर :-30 सितम्बर तक छात्रो का होगा प्रवेश
ए.के.केशकर
धाता (फतेहपुर) 25 जून। परिषद के प्राथमिक एवं जूनियर हाईस्कूल विद्यालयों का सत्र भले ही एक अप्रैल से प्रारंभ होता हो लेकिन स्कूल चलो अभियान जुलाई में करके 14 साल से कम के समस्त बालकों एवं बालिकाओं का नामांकन सुनिश्चित कराया जाता है ।ऐसे में तमाम बच्चे जो गर्मी की छुट्टियों में ननिहाल या अन्य रिश्तेदारियों से आकर विद्यालयों में दाखिला लेते हैं उन बच्चों का नामांकन 30 सितंबर तक चलता रहता है। जबकि विभाग में शिक्षकों की संख्या का निर्धारण अप्रैल माह के बच्चों के संख्या के आधार पर किया जा रहा है जो कि सही नहीं है ऐसे में शिक्षकों को परेशान तो किया जा सकता है लेकिन गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा संभव नहीं हो सकती है।
बताते चलें कि परिषदीय विद्यालयों में सीबीएसई पैटर्न पर चल रहे विद्यालयों की तरह पठन-पाठन की व्यवस्था सरकार जरूर चाह रही है लेकिन परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावक गरीब होने के साथ कम पढ़े लिखे होते हैं ऐसे में तमाम कोशिशों के बावजूद बच्चों के एडमिशन अप्रैल माह में पूर्ण रुप से नहीं हो पाते है।जिसे ध्यान में रखकर सरकार एक जुलाई को विद्यालय खुलने पर पुनः स्कूल चलो अभियान चलाकर बच्चों का शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित कराती है जिससे स्पष्ट हो जाता है कि सितम्बर तक बच्चों के नाम लिखे जा सकते हैं । 30 सितम्बर तक किसी भी बच्चे का नाम लिखने से मना नहीं किया जा सकता है।जबकि सरकार आरटीई के मानक के अनुसार 59 बच्चों में एक प्रधानाध्यापक और एक सहायक अध्यापक रखे जाने की व्यवस्था है जबकि 61 बच्चों पर एक प्रधानाध्यापक तथा 2 सहायक अध्यापक रखे जाने की व्यवस्था है ऐसे में यदि अप्रैल में उनसठ बच्चे हैं तो मानक के अनुसार एक प्रधानाध्यापक तथा एक सहायक अध्यापक होगा जबकि यदि सितंबर तक में 80 बच्चे हो जाते हैं तो भी एक प्रधानाध्यापक तथा एक सहायक अध्यापक ही रहेगा इस स्थित में गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा की उम्मीद कैसे की जा सकती है।सच तो यह है कि जब विभाग सितम्बर तक बच्चों का नामांकन होना निश्चित कर दिया है तो सितम्बर की छात्र संख्या के अनुसार अध्यापकों का समायोजन किया जाना चाहिए यदि ऐसा नहीं किया जाता तो शिक्षकों को सरकार परेशान तो कर सकती हैं लेकिन गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा की उम्मीद रखना बेमानी साबित होगा।शिक्षकों का समय से विद्यालय पहुंचना तथा विद्यालय में घंटे के अनुसार शिक्षण कार्य करने में किसी भी तरह की कोई कोताही बर्दाश्त नहीं की जायेगी। लेकिन परिवेश एवं क्षेत्रीय परिस्थितियों के अनुसार जबरदस्ती मे लिया गया कार्य गुणवत्ता पूर्ण होने की कम संभावना होती है । शिक्षक संघ धाता के अध्यक्ष हर्षवर्धन सिंह तथा मंत्री पंकज सिंह का कहना है कि शिक्षकों का समायोजन माह सितंबर की छात्र संख्या के अनुसार किया जाए हालांकि पहले उन्होंने यह कहा कि प्राथमिक विद्यालयों में छात्र कितने भी हो लेकिन कम से कम 5 कक्षाओं के लिए 5 अध्यापक होने चाहिए तभी गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा संभव है लेकिन आज की स्थिति में प्राथमिक में यदि 5 अध्यापक नहीं मिल पा रहे तो कम से कम इतना तो करना ही चाहिए की अध्यापकों का समायोजन सितंबर की छात्र संख्या के अनुसार किया जाए तथा शिक्षकों के ऊपर पठन पाठन कार्य के अलावा अन्य कार्य जबरदस्ती न थोपे जाएं।




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