जीएसटी प्रावधानों के खिलाफ व्यापारियों में आक्रोश
तीस के बंद को मिला व्यापक जनसमर्थन कई प्रावधान व्यापार विरोधी
फ़िरोज़ खान
बारां 28 जून। केंद्र सरकार के जीएसटी प्रस्तावों में खामियेां को लेकर अखिल भारतीय उद्योग एवं व्यापार परिसंघ की ओर से 30 जून को भारत बंद के निर्णय के बाद बारां जिले में भी बंद को लेकर व्यापारियों में जबरदस्त उत्साह है। जिले भर से बंद को लेकर व्यापारियों द्वारा खासी तैयारी कर जनसम्पर्क शुरू कर दिया। अंता व्यापार महासंघ द्वारा 30 जून को होने वाले अंता बंद को लेकर घोषणा बंद कर दी। वहीं सीसवाली, मांगरोल, कवाई, छबडा, छीपाबडौद से भी बंद को लेकर व्यापारियों द्वारा बैठकें आहूत कर बंद सफल बनाने की तैयारियां की जा रही है। व्यापार महासंघ अध्यक्ष ललितमोहन खंडेलवाल, संरक्षक देवकीनंदन बंसल, आबिद भाई बोहरा आदि ने बताया कि सरकार द्वारा जीएसटी में कई प्रकार की खामियां है जिनका व्यापारी डटकर विरोध कर रहे है। व्यापार पदाधिकारियों ने बताया कि केंद्र सरकार के जीएसटी प्रस्तावांे में कई खामिया है। उनमें से देश के प्रत्येक नागरिक का रोटी, कपडा और मकान पर स्वंय का अधिकार होना चाहिए लेकिन सरकार ने रोटी, कपडा और मकान पर भी टैक्स लगाकर आमजन के अधिकारों के अधिकारों का उल्लघंन किया है। भारत सरकार को अपने टैक्स प्रस्तावों में चाहिए कि जब एक देश में एक टैक्स प्रणाली कायम करने जा रही है तो फिर व्यापारी को जीएसटी के तहत एक ही टैक्स नंबर से देश भर में कारोबार करने की इजाजत हो। कम्पोजिशन 75 लाख से बढकर डेढ करोड होना चाहिए। सजा का प्रावधान व्यापार तथा लोकतंत्र विरोधी है। वहीं पेनल्टी का प्रावधान भी व्यापारी को समझने तक दो वर्ष का होना चाहिए। मिसमेच पर खरीदारी के बजाय बेचने वाले को जुर्माने के दायरे में लेना चाहिए। कम्पोजिशन स्कीम वालों को पूरे भारत में व्यापार करने की छूट होनी चाहिए। कन्साइमेंट वेब्स पर गए हुए माल को बेचा हुआ माल नही माना जाना चाहिए। वहीं देश में बहुत सारे प्रोजेक्ट ऐसे रह है जिनको कभी टैक्स के दायरे में नही लिया गया, जिन पर वैट भी नही था उनमंे जीएसटी लागू कर सरकार ने वस्तुओं पर टैक्स का दायरा बढा दिया। व्यापार महासंघ अध्यक्ष ललितमोहन खंडेलवाल ने बताया कि 30 जून के बंद केा लेकर आज बारां शहर में छोटे व लघु दुकानदारों से सम्पर्क कर बंद में सहयोग की अपील की गई।




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