गौरक्षकों ने जिन्हें मार डाला, वो गौ तस्कर नहीं, दूध बेचने वाले किसान थे
सहरीक समीम
अलवर 6 अप्रैल। राजस्थान में मेवात की नूह तहसील के रहने वाले पहलू खान घर से भैंस खरीदने निकले थे. जब जयपुर मेले में पहुंचे तो भैंस पसंद की नहीं मिली. वो किसान थे और दूध के लिए जानवर पालते थे. दूध वाली भैंस इसलिए खरीदना चाहते थे ताकि रमज़ान में दूध का उत्पादन बढ़ा लें. क्योंकि उस वक़्त दूध की काफी डिमांड रहती है. लेकिन जब एक गाय बेचने वाले ने उनके सामने ही 12 लीटर दूध निकालकर दिखाया तो उन्हें वो सौदा मुनाफे का लगा. और भैंस खरीदने का इरादा बदलकर गाय खरीद ली. जिसकी कीमत उन्हें अपनी जिंदगी से चुकानी पड़ी.
पहलू खान के 24 साल के बेटे इरशाद का कहना है, ‘पापा का फैसला उनके लिए जानलेवा साबित हुआ.’ इरशाद और उनके भाई आरिफ भी अपने पिता के साथ उस वक़्त मौजूद थे, जब उन पर हमला हुआ.
दैनिक खोज खबर से बात करते हुए आरिफ ने बताया, ‘मेरे पिता राजस्थान नंबर प्लेट वाले पिकअप ट्रक में गांव के ही अज़मत के साथ थे. ट्रक में दो गाय और दो बछड़े थे. मैं और मेरा भाई दूसरे गांव वालों के साथ दूसरे ट्रक में थे.’
इरशाद कहते हैं, ‘जब पशु लेकर अलवर के बहरोड़ पहुंचे, तो पुल को पार करते ही तकरीबन सात-आठ लोग पीछे से बाइक पर आए और हमारी गाड़ी रोकने को कहा तो हमने गाड़ी रोक दी. हमने उन्हें बताया कि इन गायों को मेले से ला रहे हैं. खरीद की पर्ची भी दिखाई, उन्होंने पर्ची फाड़कर फ़ेंक दी.’
आरिफ कहते हैं कि गौरक्षकों ने उन्हें ट्रक से खींचा और घसीटने लगे. डंडों और बेल्ट से पीटा गया. करीब 20-30 मिनट बाद पुलिस आई. तब तक उनके पिता बेहोश हो चुके थे.
गौ रक्षकों ने आरोप लगाया कि वो गायों को काटने के लिए तस्करी कर रहे थे. उनके खिलाफ दामोदर सिंह नाम के आदमी ने पुलिस में शिकायत दी और राजस्थान पुलिस ने गौ तस्करी के इल्ज़ाम में FIR दर्ज कर ली. FIR में कहा गया कि पहलू खान या किसी और के पास गायों की खरीद की स्लिप नहीं थी.
लेकिन इरशाद कहते हैं कि उन्होंने गायों को खरीदने की स्लिप दिखाई, जिसमें जयपुर नगर निगम की मुहर लगी थी. जो स्लिप 1 अप्रैल 2017 को उन्हें दी गई उसका सीरियल नंबर 89942 था. वो कहते हैं, ‘पता नहीं FIR में ऐसा क्यों दर्ज किया गया कि हमारे पास खरीद की स्लिप नहीं थी. जबकि गाएं 45 हज़ार की खरीदी थीं.’
गांव जयसिंहपुर में ज्यादातर किसान हैं. और 10 डेयरी किसान हैं. इनमें से एक पहलू खान भी थे. जिन्हें गौरक्षकों ने इतना मारा कि उन्होंने हॉस्पिटल में दम तोड़ दिया. उनके अलावा चार और किसान मेले से गाय और भैंस खरीदने गए थे. जाकिर खान गांव में सबसे बड़े डेयरी किसान हैं.
जाकिर कहते हैं, ‘मैं भी गाय का एक बछड़ा और एक भैंस खरीदकर वापस लौट रहा था. जब घटनास्थल पर हमले के 45 मिनट बाद पहुंचा तो देखा तकरीबन 200 लोगों की भीड़ जमा थी. मैंने पहलू खान की गाड़ी को खड़ा देखा. पता चला उन्हें मार दिया गया है. मैं बच गया.’ जाकिर छोटे डेयरी किसानों से दूध खरीदते हैं. वो कहते हैं कि पहलू खान दूध सप्लायर थे. और इरशाद चार साल से दूध सप्लाई कर रहे हैं.
राजस्थान के गृह मंत्री गुलाब चंद कठेरिया ने गौ-रक्षकों का बचाव किया है और कहा, ‘ गलती दोनों तरफ से हुई है. लोग जानते हैं कि गौ तस्करी गैर-कानूनी है फिर भी वो इसे करते हैं. गौ भक्त तो सिर्फ ऐसे लोगों को रोकने की कोशिश करते हैं जो ऐसे अपराधों में शामिल होते हैं.’ कठेरिया ने कहा कि कानून को हाथ में लेना गलत है. पुलिस दोनों तरफ से पड़ताल करेगी.