*हम अपनी सहनशीलता को बढाएं: नवीन सिंह परमार* 
मित्रों, 
ताश का जोकर और अपनों की ठोकर अक्सर बाज़ी घुमा देती है .जरूरत है कि हम अपनी सहनशीलता को बढाएं, छोटी-मोटी घटना से हताश मत हो.
जो चन्दन घिस जाता है, वह भगवान के मस्तक  पर लगाया जाता है, और जो नही घिसता, वह तो सिर्फ मुर्दे जलाने के काम ही आता है .
✍ श्रीनारद संवाद सेवा-सीवान