
छपरा. बिहार मे सात सुत्री माॅगो के लेकर पिछले 17 फरवरी से हडताल पर चल रहे नियोजित शिक्षको के बीच से 55 शिक्षको ने दम तोड दिया। इस हृदय विदारक घटना से विक्षुब्ध शिक्षक संघर्ष समन्वय समिति के सारण जिलाध्यक्ष मंडल सदस्य सह शिक्षक संघ बिहार के सारण जिलाध्यक्ष सुभाष कुमार सिंह एवं सचिव दिलीप गुप्ता व राकेश रंजन ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि लाॅक डाउन व वेतन के अभाव मे बिहार के नियोजित शिक्षको की स्थिति आगे दरिया पीछे खाई जैसी स्थिति हो गयी है।इसका प्रमाण बिहार के 55 निर्दोष शिक्षको को अपने प्राण की आहुति है।उन शिक्षको ने वेतनमान मिलने व सरकारी कर्मी का दर्जा प्राप्त करने सहित सात सुत्री माॅग के साथ शिक्षक संघर्ष समन्वय समिति के आह्वान पर हडताल किया लेकिन सरकार ने अपने हठधर्मिता के आगे एक भीं नही सुनी।आज उन शिक्षको के सैकडो परिवार के सदस्यो की स्थिति क्या है यह जानने के लिए भीं सरकार को कोई चिन्ता नही।इस गंभीर विपदा की घडी मे उन शोकाकुल परिवारो को न राज्य सरकार के तरफ से ना ही केन्द्र सरकार के तरफ से राशन,फ्री गैस या जीवन रक्षा हेतु आर्थिक मदद भी नही मिल सकता है क्योंकि वो बिहार सरकार के सेवारत अपना जीवन समर्पित कर चुके है।वो न बी पी एल मे आ सकते है ना ही राज्य सरकार के नजर मे उनके राज्य कर्मी है।इससे बडा दुर्भाग्य क्या हो सकता है की पूरे देश में COVID-19 से मृत भारतीयों का अकेले बिहार से 10% शिक्षको ने दवा व भोजन के अभाव मे अपने हंसते खेलते परिवार को छोड कर सदमे मे दम तोड दिए।आज सरकार यदि पूराने शिक्षको के समान वेतन सहित सभीं माॅगे पूरा भी कर भी देती है तो उन 55 परिवार के सदस्यों को कौन सी न्याय पद्धति इंसाफ दिलायेगी यह विचारणीय है। आगे से इस तरह की दर्दनाक घटना बिहार मे न घटे इसके लिए 24 घंटे के अंदर सरकार को विडियो कांफ्रेंस के जडिये वार्ता कर हरताल को खत्म करे व उन पीडित परिवार को मदद के लिए जल्द से जल्द आगे आये ताकि शोक मे डूबे उनके परिवार के अब कोई सदस्य दवा या दाना के अभाव मे दम न तोडे नहीं तो उन परिवारो के साथ बिहार के चार लाख शिक्षक-शिक्षिकांए व उनके सगे संबंधी उनके छात्र-छात्राएं व उनके अभिभावक सरकार को कभीं माफ नहीं करेंगे।




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