कुमुद रंजन सिंह की रिपोर्ट-
पटना। 5 अक्टूबर 2020 दिन सोमवार को पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से महागठबंधन से उम्मीदवार के रूप में कांग्रेस पार्टी की ओर से दिलीप कुमार के द्वारा पटना कमिश्नरी कार्यालय में नामांकन किया गया। नामांकन 3 सेटों में किया गया है नामांकन के उपरांत प्रत्याशी दिलीप कुमार ने बताया की पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में उनके द्वारा अभियान चलाकर स्नातकों को वोटर बनने के लिए प्रेरित करने का काम स्नातक अधिकार मंच के बैनर तले किया गया था। स्नातक अधिकार मंच का एक ही नारा था एक भी स्नातक छूटे नहीं वोट देने से चुके नहीं, और मैं भी स्नातक वोट मेरा अधिकार ।आज उसी जागरूकता का उदाहरण है। पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के स्नातक मतदाताओं ने प्रस्तुत किया ,जो इतनी भारी संख्या में स्नातक वोटर बने हैं। दिलीप कुमार ने कहा कि उनकी सबसे पहली प्राथमिकता स्नातकों के अधिकार दिलाने की होगी। जो भी स्नातक पढ़ लिख कर बेरोजगार है उनकी आवाज बन कर वह सदन में पहुंचेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि उनकी सबसे पहली प्राथमिकता स्नातकों की आवाज सड़क से लेकर सदन तक उठाना ही मकसद है। आज पढ़ लिख कर स्नातक की डिग्री लेकर लोग दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। यहां तक की टेक्निकल डिग्री इंजीनियरिंग एमबीए और एमसीए करके भी छात्र बेरोजगार चपरासी की नौकरी ढूंढने को विवश है। उन्होंने पूर्व के एवं वर्तमान स्नातक प्रतिनिधियों की ओर इशारा करते हुए कहा कि आज तक इस क्षेत्र से जो भी स्नातक के प्रतिनिधि हुए हैं। उन्होंने कभी स्नातकों की बदहाली की चर्चा नहीं की, स्नातक का वोट लेकर जनप्रतिनिधि तो बन जाते हैं, लेकिन उन्हें उनके हाल पर छोड़ कर एयर कंडीशन का मजा लेने में व्यस्त हो जाते हैं। आज तक किसी भी स्नातक के जनप्रतिनिधि ने स्नातकों के बीच स्नातक फंड उपयोग नहीं किया ।बल्कि होना यही चाहिए की और सरकार को भी यह नियम बनानी चाहिए कि स्नातक प्रतिनिधि का फंड हर हाल में स्नातकों के कल्याण के लिए खर्च होना चाहिए। उन्होंने अपनी जीत के प्रति आश्वस्त होते हुए कहा की पटना स्नातक क्षेत्र के स्नातक वोटरों ने पहले से ही अपना मन बना लिया है की जाति धर्म और दलगत राजनीति से ऊपर उठकर पूर्व में ही उन्हें अपना नेता चुन लिया है, और जिस तरह से नौजवान बेरोजगार छात्रों का हुजूम उनके साथ है ।उन्हें विजय पताका लहराने से कोई रोक नहीं सकता है आज उनके नॉमिनेशन में ही ऐसा देखने को मिला कि सभी दलों के लोग सभी धर्मों के लोग उनके साथ सहयोग के लिए खड़े थे।