सारण :साध्य ज्ञान व विज्ञान का भण्डार है राम चरित्र मानस – प्रभाकर प्रिया
#विकास कुमार

नगरा
प्रखण्ड के नगरा बाजार स्थित शिव मंदिर परिसर में शुक्रवार को 34वें सत्संग सम्मेलन के चौथे दिन रामचरित मानस पाठ के कथा वाचक प्रभाकर प्रिया कुमारी ने कहा कि सुख और दुख इसी धरती पर है। मृत्यु के बाद केवल आत्मा स्वर्ग लोक जाती है। धरती पर इंसान जैसा कर्म करता है उसका फल उसे यही प्राप्त होगा। मानस में तुलसी दास ने लिखा है कर्म प्रधान विश्व रचि राखा जो जस करई सो चस चाखा। मनुष्य यदि अपना मुक्ति बनाना चाहते हैं तो मानस पाठ की सीढ़ी उसे मुक्ति धाम तक ले जाएगी। भगवान राम का उलटा नाम जपते-जपते बाल्मिकी संत हो गए। पर इसके पीछे मनुष्य की मनोवृत्ति मायने रखती है। यदि किसी कार्य को करने में हमारी दिलचस्पी नहीं रहेगी तो वह काम अधूरा सदैव रहेगा। मनुष्य की मनोवृत्ति भविष्य के प्रति आश्वासन होनी चाहिए, तभी वह अपने जीवन में निश्चित सफलता की ओर बढ़ सकता है। मनोवृत्ति हमारे कार्यों का मार्गदर्शन भी करती है। इंसान यदि मानस की एक चौपाई को धारण कर लिया तो समझे उसका धरती पर मनुष्य के रूप में आना सफल हुआ। आज लोगों के पास धन और संपदा है, मगर वे दुखी है। धन से कभी खुशी प्राप्त नहीं की जा सकती। शास्त्रों में बताया गया है कि धन की तीन गतियां होती है, दान, भोग और नाश। यदि किसी के पास धन है तो वह उसका भोग करे, इसके बाद दान करे, यदि दोनों नहीं करता है तो स्वत: एक दिन धन का नाश हो जाता है।

सनातन धर्म को मानने वाले लोगों को अपने घर में राम चरित मानस की पुस्तक रखनी चाहिए। उनके घरों में तुलसी के पेड़ होने चाहिए। धर्म ही इंसान को जीवंत रखता है। हर इंसान को मानस पाठ करना चाहिए ताकि लोगों का मन, क्रम और वचन सुदृढ़ रहे। वही उनकी प्रवचन सुनने के के लिए सैकड़ों महिलाएं व पुरुष भक्तो की भीड़ उमड़ पड़ी थी। वही वृन्दावन से आए भरत दास महराज, देवघर से आए नागेन्द्र शास्त्री, वैराज्ञानन्द जी महाराज, रविन्द्र पाण्डेय आदि लोगों ने प्रवचन व कीर्तन का पाठ किया। वही 20 जनवरी तक प्रवचन का कार्य चलेगा, जिसके बाद 21 जनवरी को सत्संग का पूर्णवती होगा। उसके बाद सत्संग का समापन हो जाएगा।




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