
Saran News: धर्मेंद्र रस्तोगी/Chapra। सारण जिले के कमालपुर गांव के रहने वाले भारतीय नौसेना के जवान शैलेश कुमार ने दुनिया की सबसे कठिन ‘बैडवाटर-135 अल्ट्रा-मैराथन’ को सबसे तेज गति से पूरा कर इतिहास रच दिया है। कैलिफोर्निया की भीषण ‘डेथ वैली’ में उन्होंने यह असाधारण उपलब्धि हासिल की है।

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साधारण पृष्ठभूमि से दुनिया के शिखर तक
- किसान परिवार से नाता: सारण के गड़खा प्रखंड के कमालपुर गांव के एक साधारण किसान परिवार में जन्मे शैलेश का शुरुआती जीवन संघर्षों से भरा रहा, लेकिन उनकी अटूट लगन ने हर बाधा को पीछे छोड़ दिया।
- नौसेना की अनुशासित जीवनशैली: वर्ष 2013 में भारतीय नौसेना से जुड़ने के बाद उनके जीवन को एक नई दिशा मिली। वर्तमान में वह केरल के कोच्चि स्थित नेवल एयरक्राफ्ट यार्ड में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
- फिटनेस से अल्ट्रा रनिंग का रोमांच: साल 2014 में फिटनेस के लिए दौड़ना शुरू करने वाले शैलेश ने 2018 में ‘रन द रण’ (101 किमी) से अल्ट्रा रनिंग की दुनिया में कदम रखा और अपने पहले ही इवेंट में तीसरा स्थान हासिल किया। इसके बाद ग्रीस के स्पार्टाथलॉन सहित कई राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खिताब अपने नाम किए।
बैडवाटर-135: असंभव को किया सच
- अमेरिका की ‘डेथ वैली’ की झुलसा देने वाली गर्मी के बीच 135 मील (लगभग 217 किमी) की यह दौड़ दुनिया की सबसे कठिन पैदल दौड़ों में गिनी जाती है।
- इस ऐतिहासिक स्पर्धा के लिए उन्होंने छह महीने तक बेहद कठिन अनुशासन में अभ्यास किया और 3000 किलोमीटर से अधिक की ट्रेनिंग दूरी तय की।
- शैलेश ने मात्र 29 घंटे 28 मिनट 37 सेकंड में फिनिश लाइन पार कर नया कोर्स रिकॉर्ड बनाया और इस कठिन स्पर्धा को सबसे तेज समय में पूरा करने वाले पहले भारतीय बनकर देश का नाम रोशन किया।
शैलेश कुमार के लिए दौड़ना केवल मेडल जीतना नहीं, बल्कि आत्म-अनुशासन और ध्यान का मार्ग है। उनका यह सफर देश के युवाओं के लिए एक मजबूत संदेश है कि यदि इरादे मजबूत हों, तो संसाधन और उम्र कभी सफलता की राह में रुकावट नहीं बनते।





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