
रचनात्मक प्रतिभा को मंच पर प्रदर्शित करते नन्हें प्रतिभागी
धर्मेंद्र रस्तोगी/छपरा, 27 अगस्त 2026।
सारण जिला मुख्यालय स्थित बिहार बाल भवन किलकारी में सावन उत्सव का आयोजन अत्यंत हर्षोल्लास और उत्सवी माहौल में किया गया। इस विशेष आयोजन का मुख्य उद्देश्य बच्चों को भारतीय लोक संस्कृति, परंपराओं एवं प्रकृति से जोड़ना तथा उनकी रचनात्मक प्रतिभा को एक बेहतरीन मंच प्रदान करना था। कार्यक्रम स्थल को सावन की थीम, हरियाली, पारंपरिक झूलों और सुंदर फूलों से बेहद मनमोहक ढंग से सजाया गया था।
लोक संस्कृति और प्रकृति का अद्भुत संगम
सावन की हरियाली, पारंपरिक संगीत और लोक नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियों ने पूरे कार्यक्रम को जीवंत बना दिया। किलकारी के प्रतिभावान बच्चों ने अपनी शानदार कला, नृत्य, संगीत और कविताओं के माध्यम से सावन के मौसम की सुंदरता और प्रकृति के प्रति अपने अगाध प्रेम को बेहद खूबसूरती से अभिव्यक्त किया। इस सांस्कृतिक उत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण बच्चों द्वारा प्रस्तुत राधा-कृष्ण की मनमोहक झांकी रही, जिसने वहां उपस्थित सभी दर्शकों और अतिथियों का मन मोह लिया।
रचनात्मक प्रतियोगिताओं में बच्चों का दिखा उत्साह
उत्सव को और अधिक रोमांचक बनाने के लिए बच्चों के बीच विभिन्न प्रकार की रचनात्मक एवं मनोरंजक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिनमें बच्चों ने बढ़-चढ़कर अपनी कला का प्रदर्शन किया:
- सावन राजा और सावन रानी प्रतियोगिता: बच्चों ने पारंपरिक वेशभूषा में अपनी अनूठी छाप छोड़ी।
- पारंपरिक हरा ड्रेस प्रतियोगिता: बच्चों ने हरे रंग के वस्त्रों में अपनी संस्कृति की अनूठी झलक दिखाई।
- मेहंदी लगाओ प्रतियोगिता: बाल कलाकारों ने अपनी उंगलियों पर खूबसूरत और पारंपरिक मेहंदी के डिजाइन उकेरकर अपनी कला का लोहा मनवाया।
अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी
इस आयोजन में केवल बच्चों ने ही नहीं, बल्कि उनके अभिभावकों ने भी पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लिया। माता-पिता के लिए विशेष रूप से म्यूजिकल चेयर प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें उन्होंने बड़े जोश के साथ भाग लिया और अपने बच्चों के साथ इस उत्सव के आनंद को पूरी तरह साझा किया।

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पर्यावरण संरक्षण का महत्वपूर्ण संदेश
यह उत्सव केवल मनोरंजन तक ही सीमित नहीं था, बल्कि इसके माध्यम से समाज को एक बहुत ही महत्वपूर्ण संदेश भी दिया गया। कार्यक्रम के दौरान यह बताया गया कि सावन सिर्फ उत्सव का महीना नहीं है, बल्कि यह प्रकृति और पर्यावरण के संरक्षण का संकल्प लेने का अवसर भी है।बच्चों और उपस्थित सभी लोगों को अधिक से अधिक पौधे लगाने तथा अपने आसपास की प्रकृति को हरा-भरा और सुरक्षित रखने के लिए प्रेरित किया गया। प्रमंडलीय मुख्यालय सारण के छपरा शहर स्थित किलकारी द्वारा आयोजित इस सफल कार्यक्रम ने बच्चों, अभिभावकों, केंद्र के कर्मियों और प्रशिक्षकों को एक सूत्र में पिरोते हुए लोक संस्कृति, कला और प्रकृति के प्रति प्रेम की अनूठी मिसाल पेश की है।




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