शिक्षा विभाग के कारनामे जान हो जायेंगे अचम्भित! 8 कमरे के एक विद्यालय में 10 विद्यालय का हुआ है विलय
#अब 1500 नामांकित छात्रों को 23 रसोइया और 45 शिक्षक एक ही विद्यालय में…..
#संजय कुमार पांडेय

छपरा
बच्चों के मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा अधिनियम 2009 एवं बिहार राज्य बच्चों की मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा नियमावली 2011 के अंतर्गत 6 से 14 वर्ष आयु वर्ग के छात्र छात्राओं को प्राथमिक शिक्षा सुनिश्चित किया गया जिसके तहत विगत कुछ वर्षों में सरकार द्वारा बिहार राज्य में लगभग 21000 नए प्राथमिक विद्यालय स्थापित किए गए।लेकिन इनमें से कुछ विद्यालय ऐसे है जिनके लिए भूमि की व्यवस्था नही हो सकी और ये भवन विहीन रह गए।ऐसे विद्यालयों को वर्तमान में प्राथमिक तथा मध्यविद्यालयो के साथ सम्बद्ध करके पढ़ाई की व्यवस्था करनी है।2011 ई में खुले ये विद्यालय 21000 थे जिनमें मात्र 1773 विद्यालयों को भवन के अभाव में दूसरे विद्यालयों में विलय करना है । जिनकी दूरी 1 किलोमीटर से अधिक न हो।इसी कड़ी के तहत सारण जिला में भी 101 विद्यालय खुले गए । लेकिन इन विद्यालयों के विलय में शिक्षा विभाग द्वारा अजीबोगरीब स्थिति उत्पन्न कर दी गयी।सारण जिला में 101 में से 87 विद्यालयों का विलय विभिन्न विद्यालयों में कर दिया गया।जबकि होना चाहिए था 101 क्योंकि ऐसे 101 विद्यालय सारण जिला में है।

अब छपरा के शिक्षा विभाग का खेल देखिये।सुन कर सभी अचंभित हो जाएंगे एक विद्यालय जिसमे मात्र 8 कमरे है।और उसमें समाहित कर दिए गए।10 स्कूल छपरा शहर के डी इ ओ मुख्यालय से मात्र 5 मिनट के पैदल रास्ते मे पड़ता है डी ए वी कान्या मध्य विद्यालय गंडक नगर जिसमे मात्र 8 कमरे है और इसी स्कूल में मर्ज कर दिए गए 10 स्कूल ।अब इस विद्यालयों के शिक्षक एवं छात्रो तथा अभिभावकों के सामने अनेको समस्याएं उत्पन्न हो गयीहै।अंदाज लगाया जा सकता है कि इन विद्यालयों में करीब 1500 छात्रो का नामांकन है।मात्र 8 कमरे में कैसे होगी पढ़ाई ।छोटी सी रसोईघर में 23 रसोइया एक साथ कैसे बनाएगी रसोई ।करीब 45 शिक्षक किस तरह करेगे पढ़ाने का काम क्योकि इन शिक्षकों के लिए यदि 45 कुर्सी की व्यवस्था हो भी जाय तो रखने के लिए कम से कम एक रूम तो चाहिए ही ।सिर्फ कागज के माध्यम से विलय कर दिया गया है।मात्र डी ए ओ कार्यालय से 400 मीटर की दूरी पर है डी ए वी कन्या स्कूल लेकिन वहाँ तक जा कर नही देखा गया कि विलय के बाद इसमें कैसे अटगे 1500 छात्र।
इस विलय के खेल में एक और खेल सारण के शिक्षा विभाग द्वारा खेल गया है बिहार सरकार के पत्र में स्पष्ट निर्देश है कि 2011 में स्थापित नव सृजित प्राथमिक विद्यालय का विलय करना है लेकिन यहाँ तो पदाधिकारियों ने 1954 में स्थापित महेंद्र मध्यविद्यालय का ही डीएवी कन्या मध्यविद्यालय गंडक नगर में कर दिया गया।जबकि पहले ही महेंद्र मध्यविद्यालय में 4 प्राथमिक विद्यालय का विलय किया जा चुका है। महेंद्र मध्यविद्यालय डीएवी कन्या मध्यविद्यालय में सुबह 7 बजे से 12 बजे तक चलता है ।इसके कर्मठ प्रभारी प्राचार्य शत्रुघन सिंह अपने 288 विद्यार्थियों को स्कूल के बरामदे में जमीन पर ही बैठा कर पढ़ाने का काम करते है।इनके वर्ग 1 से 3 तक के छात्र बरामदे के फर्श पर बैठ कर पढ़ते है।मौसम चाहे जो भी हो।

#शारीरिक शिक्षक बन बैठा प्रभारी
जिस डी ए वी कन्या मध्य विद्यालय में इन 10 स्कूलो का विलय किया गया है उसके प्रभारी प्राचार्य अनिल कुमार एक शारीरिक शिक्षक है।जबकि बिहार सरकार की शिक्षा नियमावली के अनुसार किसी भी शारीरिक शिक्षक को प्राचार्य का पद नही दिया जाना है ।नियमित शिक्षकों के रहते अनिल कुमार जो एक शारीरिक शिक्षक है डी ए वी कन्या मध्यविद्यालय के करीब 6 वर्षो से प्राचार्य का पद संभाले हुए है।
#क्या कहते है अधिकारी ?-
मामला संज्ञान में आया है जल्द ही जांच कराया जाएगा।-
राज किशोर सिंह डीइओ सारण




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