मढ़ौरा के दुर्गापूजा पंडाल मेंं उज्जैन के महाकालेश्वर मन्दिर की झलक

मढ़ौरा(सारण). स्थानीय स्टेशन रोड मेंं कलश स्थापना के साथ ही दुर्गापूजा के पंडाल आहिस्ते-आहिस्ते उज्जैन के महाकालेश्वर मन्दिर की झलक देने लगा है. साथ ही विभिन्न पंडालों का निर्माण भी अब अपने अंतिम चरण में है.

नगर मेंं विभिन्न थीमों पर बन रहे पंडाल अलग-अलग आकृति व सामाजिक संदेश देने के साथ देश की सांस्कृतिक विभिन्नताओं को भी दर्शाने का काम मेंं जुटे है.

महावीर दुर्गा पूजा समिति द्वारा विगत तेरह वर्षो से स्टेशन रोड मेंं भव्य पूजा के परम्परा के निर्वहन मेंं सतत कार्यशील है.नवयुवकों की टोली सामूहिक प्रयास से दुर्गा पूजा मेंं प्रति वर्ष पंडाल व मूर्ति की भव्यता को कुशल कारीगरों द्वारा निर्माण करा कर वाह वाही लें रहे है.61फीट लम्बी व 35 फीट चौड़ी बनने वाली दुर्गापूजा के पंडाल का निर्माण हर वर्ष अलग-अलग आकृतियों मेंं होती है.इस वर्ष उत्तर प्रदेश के उज्जैन शहर स्थित महाकालेश्वर मन्दिर की आकृति की झलक दिखाने के लिये एक दर्जन कुशल कारीगर हरेराम प्रसाद के नेतृत्व मेंं एक पखवारा से दिन-रात कार्य कर जुटे हुये है.पंडाल का लगभग 80 फीसद निर्माण हो गया है. समय कम रह गया है.इसके मद्देनजर कारीगरों की टीम दिन-रात एक कर पंडाल को अंतिम रूप देने में लगी है.वहीं आदि शक्ति दुर्गा मां की मूर्ति को जीवंत शक्ल मेंं प्रदर्शित करने के उदेश्य से मशहूर शिल्पकार कैलाश पंडित कार्य कर रहे है.यहां पर पूजा का विधि आयोध्या के पंडित शास्त्रीय विधान से सम्पन्न कराते है.सप्तमी को मां दुर्गा का पट खुलते ही क्षेत्र के श्रधालुओ की भीड़ प्रतिदिन जुटाना शुरू हो जाता है।शाम के आरती मेंं स्थानीय शहर की महिलाएं व पुरूषों की आस्था ऐसी रहती है की दूर तक लम्बी कतारें लग जाती है।जबकि दीप ज्योति प्रतियोगिता भी हर वर्ष अपनी आकर्षण बढ़ाते ही जा रहा है.इसमे लड़कियां व महिलाएं भाग लेती है.जिसमें उत्कृष्टता के लिये प्रतिभागी को पुरस्कृत भी किया जाता है.पूजा समिति मेंं अहम भूमिका मेंं ब्रजकिशोर सिंह, मंटू सिंह, कामेश्वर सिंह, छठीलाल चौरसिया, मुरारी प्रसाद, मनोज सिंह, धर्मवीर सिंह, उपेंद्र सिंह, सोनू सिंह, मुकेश सिंह सहित अन्य स्थानीय युवा भी रहते है.