मांझी। कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के उद्देश्य से सरकार द्वारा जारी लॉक डाउन ने मध्यम वर्गीय परिवार को बुरी तरह आहत किया है। इसके दो प्रमुख कारण है। चूंकि अमूमन अमीर वर्ग को किसी की सहायता की जरूरत नही पड़ती। तथा गरीब के लिए नेता समाजसेवी और सरकारी सहायता देने वाले पदाधिकारी मिल ही जाते हैं। इस सबके विपरीत एक सामाजिक विडंबना यह है कि मध्यम वर्गीय परिवार अपना दर्द किसी को दिखा नही सकता। जग हंसाई के कारण वह राहत हासिल करने वालों की कतार में खड़ा भी नही हो सकता। समाज तथा सरकार दोनों की नजर में मध्यमवर्गीय परिवार गरीब की अहर्ता नहीं रखते। कुछ विसंगतियों के कारण मांझी के अधिकांश मध्यम वर्गीय परिवारों के राशन कार्ड का आवेदन जिला मुख्यालय के कार्यालयों में धूल फांक रहे हैं। फलस्वरूप इन परिवारों को सस्ते दर पर अथवा मुफ्त सरकारी अनाज भी नसीब नही हो पा रहा है। लॉक डाउन की अवधि में उद्योग धंधों तथा वाहनों का परिचालन पूरी तरह ठप हो जाने से भी इन परिवारों की आमदनी बन्द है। मध्यम वर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाले कई लोगों ने अपनी पीड़ा का इजहार करते हुए बताया कि हमारा दर्द सुनने जानने का कोई प्रयास नही करता। लॉक डाउन में कोई कर्ज भी नही देता। दुकानदार उधार देने के बजाय मुँह मोड़ लेते हैं। येन केन प्रकारेण किसी तरह अपने परिवार का पेट भरने के लिए राशन के साथ साथ ईंधन।जलावन। तथा पशुचारा का जुगाड़ करना अब दूभर हो रहा है। कई लोग तो जग हंसाई के चलते अपना जेवर आदि गिरवी रख परिवार की भूख मिटाने तथा बीमार परिजनों का इलाज कराने को विवश हैं। सरकार द्वारा लॉक डाउन की अवधि यदि दुबारा बढ़ाई जाती हैं तो इन परिवारों की समस्याएं और विकराल बन जाएंगी।
शादी विवाह की तैयारी में लगे लोगों के घर शहनाई बजेगी या नही संशय बना हुआ है। खासकर मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए यह गम्भीर चुनौती है। लोक लाज से बचने के लिए लोग अप्रैल मध्य से शुरू होने वाले लगन वाली शादियों की तिथि में जबरदस्त हेरफेर कर रहे हैं। लोग अपनी अपनी शादियों को नवम्बर दिसम्बर तक टाल रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि लॉक डाउन जारी रहा तो शादी समारोहों के उल्लास पर पानी फिर जाएगा। कोई रिश्तेदार भी नही आएगा। ब्यवसायिक वाहन टेंट पंडाल नाच बाजा आदि के संचालक पेशोपेश में हैं। अब सबकी निगाहें पीएम मोदी के आगामी मन की बात कार्यक्रम पर टिकी हुई हैं।