दुर्गा दत्त पाठक की रिपोर्ट:-

चौंकिए नहीं, यहाँ चिकित्सकों के क्लीनिक में रोगी की मौत होना आम बात हो गई है। आए दिन ऐसी घटनाएं घट रही है, इतना सबके बावजूद शासन व प्रशासन आज भी सतर्क नहीं है, सबसे बड़ी चौंकाने वाली बात यही है। उल्लेखनीय है कि बानु छापर ओपी निवासी बहादुर राम का पुत्र सुरेश राम उम्र 33 वर्ष को सांस लेने की समस्या हो हुई, उन्हें “आस्था हॉस्पिटल खिरिया घाट” में इलाज के लिए भर्ती किया गया। रोगी (मरीज) की स्थिति बिगड़ने लगी, तो मृतक के परिजनों ने डॉक्टर को बार-बार रिक्वेस्ट किया कि वे आकर रोगी को देख लें। अलबत्ता मरीज़ की मौत होने के बाद भी प्रथम बार देखने के बाद, दूसरी बारबार झांकने तक चिकित्सक नहींआया। मरीज के परिजनों का कहना है कि भर्ती किया गया रोगी रात में ही मर गया अलबत्ता और रुपये के लिए मरे हुए व्यक्ति के शव को बंद करके रखा। अस्पताल प्रबंधन ने जब एक लाख 75 हजार रुपये लिया और मृतक को बाहर का रास्ता दिखाया दिया। इस संदर्भ में डॉ. अंजनी कुमार ने बताया कि को खून की कमी थी, उसके परिजनों को बोला गया लेकिन उन्होंने खून उपलब्ध नहीं कराया इसलिए मरीज की मौत हो गई।