खुद के दम पर चर्चा के केंद्र में है व्यवसायी सुरेश प्रसाद◆अनूप नारायण सिंह/पटना : कहते हैं कि दिल में कुछ कर गुजरने की तमन्ना हो तो तमाम बाधाओं के बावजूद इंसान अपनी मंजिल को प्राप्त कर लेता है कठिन परिश्रम और अदम्य साहस के बल पर बाधा पर विजय प्राप्त करने की कहानी सरीखी है पटना के पालीगंज अनुमंडल के दुल्हन बाजार थाना अंतर्गत सेल्हौरी गांव के एक साधारण परिवार में जन्मे और अपने बलबूते आज सफलता का मुकाम पर पहुंचे सुरेश प्रसाद की कहानी. श्री भदेश्वर सिंह और पार्वती देवी के घर छह भाई और दो बहनों के परिवार में सातवें नंबर पर सुरेश प्रसाद का जन्म 16 जुलाई 1969 को जन्म हुआ सेल्हौरी ग्राम पटना दुल्हिन बाजार इनका जन्म स्थान है. स्कूल की शिक्षा पालीगंज से हुई जबकि पटना के दानापुर के बीएस कॉलेज से जूलॉजी ऑनर्स की शिक्षा प्राप्त की।प्रारंभिक दौर में 1995 में मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव के रूप में अपने करियर की शुरुआत की और 8 वर्ष बाद 2003 में खुद की कंपनी हैरिसन फार्मा की स्थापना की. इस कंपनी में 22 लोग काम करते है. सुनीता देवी के साथ परिणय सूत्र में बंधे सुरेश प्रसाद दो पुत्रों के पिता हैं दोनों पुत्रों का नाम अमन आनंद और नमन आनंद. स्कूल ऑफ ग्लोबल एजुकेशन नाम से पटना के कुर्जी मे इन्होंने खुद का विद्यालय खोला है जिसकी देखरेख इनकी पत्नी करती हैं इस विद्यालय में एक से आठवीं तक की शिक्षा दी जाती है सौ से ज्यादा लोगों को रोजगार दे चुके हैं. साफ सुथरा व्यवसाय करने और समय पर टैक्स अदा करने के कारण इन्हें आयकर विभाग द्वारा 2017-18 व 2018-19 मे ब्राज मैडल से सम्मानित किया गया है.सुरेश प्रसाद अखिल भारतीय युवा कुशवाहा समाज के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व जदयू तकनीकी सेल के मीडिया प्रभारी सह उपाध्यक्ष भी हैं. सफलता के लिए सजगता को अहम.मानने वाले सुरेश कहते हैं कि स्वरोजगार रोजगार का सबसे बेहतर विकल्प है।अगर आपकी सोच सही है और आप खुद पर भरोसा रखते हैं तो कोई भी काम करते हैं तो आपको सफलता जरूर मिलेगी अपनी सफलता का श्रेय अपनी परिजनों और पत्नी को देने वाले सुरेश प्रसाद कहते हैं इंसान संघर्ष मे अकेला होता है सफलता आती है तो ढेर सारे लोग उसके पीछे खड़े होते हैं उन्होंने जीवन में कई उतार-चढ़ाव देखे है।दवा का व्यवसाय रियल स्टेट और स्कूल का बिजनेस में उन्होंने सफलता पाई है. सामाजिक राजनीतिक और व्यवसाय क्षेत्र में एक अनूठी पहचान बना रहे सुरेश प्रसाद बिहार के युवाओं के लिए आदर्श है जो अपने अभाव का रोना रोते हुए संघर्ष करने से दूर भागते हैं सफलता के लिए सजगता के साथ कठिन परिश्रम करने वाले सुरेश प्रसाद कहते हैं कि वर्तमान दौर में सरकारी नौकरियां मिलना बहुत कठिन है प्राइवेट सेक्टर में भी बहुत सारा कंपटीशन है अगर कोई भी बेरोजगार इनके पास आता है और उसके अंदर कार्य करने की क्षमता होती है उसे अपने प्रतिष्ठान में जरूर मौका देते हैं समृद्ध समाज विकसित बनाने के संकल्प के साथ सुरेश प्रसाद कार्य कर रहे हैं।