कटिहार जिले के फलका में अब पत्रकार भी नहीं है सुरक्षितप्रादेशिक डेस्क/दैनिक खोज कवर की खास कवरेज :बिहार के मोतिहारी में जन्में ब्रिटेन के मशहूर लेखक और पत्रकार जॉर्ज ऑरवेल ने कहा था “जब कोइ समाज सच से दूर होने लगता है तो उसे सच बोलने वाले लोगों से नफरत होने लगता है” इसलिए भारतीय पत्रकारों को सच की गरिमा को बनाए रखने कि जरुरत है, ताकि लोकतंत्र कि नींव मजबूत हो और सुदंर तथा समृद्ध भारत बन सके।
पत्रकारिता अगर लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है तो पत्रकार इसका एक सजग प्रहरी है। देश को आजादी दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली पत्रकारिता आज़ादी के बाद भी अलग-अलग परिदृश्यों में अपनी सार्थक जिम्मदारियों को निभा रही है।
लेकिन मौजूदा दौर बिहार में पत्रकारिता दिनों दिन मुश्किल बनती जा रही है। जैसे-जैसे समाज में अत्याचार, भ्रष्टाचार, दुराचार और अपराध बढ़ रहा है, पत्रकारों पर हमले की घटनाएं भी बढ़ रही हैं। दरअसल, पत्रकारों पर हमला वही करते हैं या करवाते हैं जो इन बुराइयों में डूबे हुए हैं ऐसे लोग दोहरा चरित्र जीते हैं। आइये आपको ले चलते हैं बिहार के कटिहार जिला। जहां समय प्रसंग पत्रिका के पत्रकार रूपेश कुमार को अचानक निजी दुकान पर दबंगों ने जम कर पीटा…।इसको लेकर पीड़ित पत्रकार द्वारा दी गई शिकायत पर पुलिस ने स्थानीय थाने में कांड संख्या 12/20दर्ज कर ली है।लेकिन अभी तक कार्रवाई के नाम पर धरातल पर कुछ नहीं दिख रहा है।

जानकारी के मुताबिक रूपेश कुमार फलका गोपालपट्टी निवासी समय प्रसंग पत्रिका में कटिहार से पत्रकार के रूप में कार्यरत है। पत्रकार के हैसियत से गांव के सरकारी स्कूल को लेकर गांव वासी ने अपनी परेशानी सुनाई, जिस पर रूपेश कुमार ने उक्त मामले को लेकर कुछ माह पूर्व स्कूल प्रधानाद्यापक से पूछ-ताछ की जिसमे कुछ त्रुटियां पाई गई, उसमे सुधार लाने की प्रतिकिर्या जताई थी। स्कूल की चरमराई व्यवस्था ठीक न होने पर पत्रकार रूपेश ने शिक्षण कार्य को सुव्यवस्थित करने को लेकर वरीय पदाधिकारी व बिहार लोक शिकायत निवारण में स्कूल से संबंधित समस्याओं को लेकर ऑनलाइन शिकायत अनन्य संख्या 999990116071971049 16 जुलाई 19 को किया था। वहीं हाल ही में शिक्षा पदाधिकारी द्वारा औचक निरीक्षण में त्रुटियां मिली। जिसे पत्र के माध्यम से वरीय अधिकारी द्वारा कार्रवाई की गई।
इसी मामले को लेकर दिनांक 13/01/2020 को उसके परिजनों द्वारा एक जुट होकर पत्रकार रूपेश को उसी के किताब दुकान पर जमकर पिटाई कर दी और कई तरह की धमकियां भी दी। जिससे उन्हें काफी अंदरूनी चोटें भी आई। कुछ सामान ले रहे ग्राहकों ने उसे तुरंत फलका अस्पताल ले जाकर इलाज़ करवाया गया। हालांकि पत्रकार ने इसकी सूचना फलका पुलिस को लिखित आवेदन देकर उक्त मामले की जांच कर उचित कार्यवाई की गुहार लगाई है। उन्होंने दो आदमी को नामजद कर दुकान में घटी घटना को भी बताया। काफी मारपीट के बाद दुकान में तोड़-फोड़, दुकान के सारे पैसे और पैकेट का सारा पैसा निकाल लेने और धमिकियाँ देते हुए चले जाने की बात आवेदन में की गई। हालांकि खबर लिखने तक फलका पुलिस ने अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ और पत्रकारों को लोकतंत्र का प्रहरी कहा जाता है। जहां एक तरफ पत्रकारिता लोगों में जागरूकता पैदा करके लोकतंत्र को मजबूती प्रदान करता है, वहीं लोकतंत्र के दूसरे स्तंभों यानी कार्यपालिका और न्यायपालिका पर भी नज़र रखता है। कटिहार के पत्रकारों को अपना काम ईमानदारी से करने का जख्म की शक्ल में मिले, तो इससे न सिर्फ देश की कानून व्यवस्था सवालों के घेरे में आ जाती है बल्कि यह लोकतंत्र के लिए भी ठीक नहीं है।
अतः पत्रकारों पर हो रहे हमलों और उनकी असुरक्षा को देखते हुए यह ज़रूरी हो गया है कि उनकी सुरक्षा के लिए विशेष कानून बनाया जाए और उन पर हुए हमलों के मामलों को स्पीड ट्रायल के जरिए निपटाया जाए।