एनीमिया मुक्त भारत के तहत आशा कार्यकर्ताओं को दिया गया प्रशिक्षण
• एनिमिया मुक्त भारत का सपना होगा साकार
• जिले के सभी प्रखंडों में चलाया जा रहा प्रशिक्षण कार्यक्रम
• सप्ताहिक रिपोर्टिंग प्रतिवेदन के लिए हुआ उन्मुखीकरणछपरा: एनिमिया मुक्त भारत के तहत जिले में आशा कार्यकर्ताओं एवं शिक्षकों को ट्रेनिंग दी जा रही है। जिले के सभी प्रखंडों में प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जा रहा है। मंगलवार को गड़खा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भी एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। इस दौरान एनीमिया एवं एनिमिया से रोकथाम में आयरन फोलिक एसिड के महत्व के बारे विस्तार से जानकारी दी गयी।
इस दौरान केयर इंडिया के प्रखंड प्रबंधक प्रशांत सिंह ने आशा कार्यकर्ताओं को साथ ही एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम के तहत आयरन फोलिक एसिड कि गोली एवं सिरप के वितरण के बारे में प्रोजेक्टर के माध्यम से चल चित्र दिखाकर आशा कार्यकर्ताओं को जानकारी दी । उन्होंने बताया एनीमिया के कारण होने वाले मातृ मृत्यु दर एवं शिशु मृत्यु दर में निरंतर बढ़ोतरी हो रही है। इसके लिए जन्म के तुरंत बाद समय से ही शिशु के प्रति ख्याल व धात्री माता को पौष्टिक आहार देने में कमी नहीं करें। आशा कार्यकर्ताओं को अपने-अपने क्षेत्रों में गृह भ्रमण कर माताओं को आयरन फोलिक सिरप के लिए प्रोत्साहित करने एवं उसे बच्चों को पिलाने की विधि आदि के बारे जानकारी देने का निर्देश दिया गया।
प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. सरबजीत कुमार ने एनीमिया मुक्त अभियान के तहत विटामिन ए एवं फोलिक एसिड के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि महिलाएँ एवं किशोरियां खून की कमी से ज्यादा ग्रसित रहती हैं। विशेषकर ग्रामीण इलाकों में महिलाएं जानकारी के अभाव में तथा पोषक तत्वों की कमी की वजह से एनीमिया की शिकार हो रहीं हैं। इसके लिए सामुदायिक स्तर पर जन-जागरूकता में गति लाने की जरूरत है। जिसमें आशा एवं आशा फैसीलीटेटर की अहम भूमिका होगी।
सप्ताहिक रिपोर्टिंग प्रतिवेदन पर उन्मुखीकरण: प्रशिक्षण के दौरान जानकारी दी गयी कि पूर्व में सिविल सर्जन डॉ. माधवेश्वर झा ने सभी प्रभारी प्रखंड चिकित्सा पदाधिकारियों को पत्र जारी कर निर्देश दिया था कि सप्ताहिक आयरन फॉलिक एसिड कार्यक्रम चलाया जा रहा है जिसके तहत विद्यालयों व आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को आयरन की दवा दी जा रही है। इसकी रिपोर्टिंग में त्रुटी पायी जा रही है। ससयम रिपोर्टिंग नहीं की जा रही है। इसे दूर करने के लिए प्रखंडस्तर पर उन्मुखीकरण कार्यक्रम किया जाये। इसमें विद्यालय के नोडल शिक्षक, बाल विकास सेवा परियोजना के पदाधिकारी,महिल पर्यवेक्षिका, प्रखंड बीएमएनई, डाटा ऑपरेटरों को शामिल कर उन्मुखीकरण किया जा रहा है।
क्या है जिले का आंकड़ा: राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-4 वर्ष 2015-16 के अनुसार जिले में 6 से 59 माह के 61.9 प्रतिशत बच्चे, 15 से 49 साल के 22 प्रतिशत पुरूष एवं 15 से 49 साल के 50.4 प्रतिशत महिलाएं एनिमिया से ग्रसित है।
सप्ताह के प्रत्येक बुधवार व शनिवार को दी जाती है दवा:
साप्ताहिक आयरन फोलिक एसिड अनुपूरण कार्यक्रम के तहत प्रत्येक बुधवार व शनिवार को 6 से 9 वर्ष के बच्चों को गुलाबी गोली तथा 11 से 19 वर्ष की किशोरियों को नीली गोली दी जाती है| साथ ही एनीमिया मुक्त बनाने के लिए आंगनबाड़ी सेविका द्वारा 6 माह से 59 माह के बच्चों को घर -घर जाकर आयरन का सीरप पिलाया जाता है |