✍नवीन सिंह परमार “निदेशक” परमार डाॅट काॅम: सीवान 
👉वामपंथी कुल – मुल के पत्रकारों व डिजाइनर बुद्धिजीवियों से कहना चाहूंगा कि  तुम चाहें जितना वेब पोर्टल बना लो, तुम चाहें जितना प्रयास कर लो लेकिन अब यह देश तुम्हारी नहीं सुनने वाला है ।👈
🔴श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी पंचतत्व में विलीन हो चुके है । पुरा विश्व जानता है कि वे कैसे नेता व इंसान थें । जनता के बीच वे कितने लोकप्रिय थें, यह उनके जीवन काल हो या  निधन के बाद उमड़ा जनसैलाब बताने के लिए काफी है ।
इस देश में वामपंथी कुल – मुल के कुछ पत्रकार व  डिजाइनर बुद्धिजीवी आज भी श्रद्धेय अटल जी को गलत सिद्ध करने में बाज नहीं आ रहे है । ये वामपंथी अपनी आदत से मजबूर हैं । इनकी विचारधारा उस गंदगी से उपजी है कि इन्हें गंदगी के अलावे कुछ दिखाई ही नहीं देता है । 16 अगस्त के सुबह से ही ये सारे वामपंथी पत्रकार व उनके द्वार संचालित मीडिया हाउस श्रद्धेय अटल जी के संबंध में गलत जानकारियां प्रसारित करने में लगें हुए हैं । इन वामपंथियों को यह पच ही नहीं रहा है कि संघ का कोई एक स्वयंसेवक इतना लोकप्रिय कैसे हो सकता हैं । 
ये वामपंथी केवल दूसरे में कमियां खोजने में मास्टर होते हैं । अपने पुरे जीवन में ये ऐसा कोई काम नहीं करते हैं जिससे कारण लोग इनके मरने के बाद भी याद रखें । इन वामपंथियों की काम ही कुछ ऐसा होता है कि लोग इन्हे जीते जी भूला देना पसंद करते है ।
ये वामपंथी अटल जी के जीवन काल में भी हमेशा उनके विरोधी रहें और आज उनके निधन के बाद भी उनका विरोध करने से बाज नहीं आ रहे है ।
इनको कौन समझाएं की अटल बिहारी वाजपेयी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यशाला से तैयार एक ऐसा व्यक्तित्व है जिसे पुरी दुनिया प्यार करती है । शायद इन्हें पता नहीं कि  अटल  जैसा व्यक्तित्व पैदा करने की क्षमता केवल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रयोगशाला में ही है । 
अंत में इन वामपंथी कुल – मुल के पत्रकारों व डिजाइनर बुद्धिजीवियों से कहना चाहूंगा कि  तुम चाहें जितना वेब पोर्टल बना लो, तुम चाहें जितना प्रयास कर लो लेकिन अब यह देश तुम्हारी नहीं सुनने वाला है ।
यह देश अब जग चुका है । अब इसे कोई ” भारत माता की जय ” कहने से कोई रोक नहीं सकता है ।