​*पटना:सरकार के प्रधान सचिव स्तर की  तीसरी वार्ता में सेविका सहायिका संघ के सात मांगों पर सहमति*
👈चंदन कुमार झा,दैनिक खोज खबर,पटना 👉
बिहर राज्य आंगनबाड़ी कर्मचारी युनियन की प्रदेश महासचिव कुमार विन्देश्वर व  अध्यक्षा चन्द्रावती देवी से कल 16.05.17 को  मिली जानकारी के मुताबिक बिहार राज्य सेविका सहायिका संघ की अपनी 16 सुत्री मांगों को लेकर 54 दिनों से किये गये धरना प्रदर्शन व हड़ताल जो कि  विगत 24 मार्च 2017 से चली आ रही थी , अाखिरकार 16 सुत्री मांगों में से 7 गैरवित्तीय मांगों पर बनी सरकार की सहमती के बाद  दिनांक- 17/ 5/ 2017 से सभी सेविका सहायिका को  अपनी- अपनी कामों पर हड़ताल तोड़कर वापसी की घोषणा राज्य स्तरीय संघ के आदेश जिलाध्यक्ष से मीटिंग के बाद से कर दी गयी ! अब सेविका व सहायिका को संघ व  सरकार के पत्रों द्वारा हड़ताल तोड़ने व काम पर लौटने की आदेश की आशा है !
       जिन सात मांगों को सरकार के प्रधान  सचिव व संघ के सदस्यों के साथ सहमति बन पायी है उसमें मिली  जानकारियों के अनुसार 
चिकित्सा व मातृत्व अवकाश ,   सेवा निवृति की उम्र 60 से 65 वर्ष ,सेवा काल में हटाने की कारवाई पर रोक , जब तक  सरकारी कर्मचारी का दर्जा नही मिलता ,चुनाव तथा अन्य सुविधा से रोक हटाना , मिनी आंगनबाड़ी केन्द्रों की सेविका को समान मानदेय एवं अन्य सुविधा , सेविका को सुपरवाईजर एंव सहायिका को सेविका के पद पर  प्रमोशन  आदि है | संघ व प्रधान सचिव के सहमति के बाद बचे हुये विन्दुओं पर विचार के  लिये  कुछ समय मांगा गया है !
गौर करने की बात है बाल विकास परियोजना में जितने कर्मचारी हैं लगभग महिलाऐं हैं यथा -सेविका , सहायिका ,पर्यवेक्षिका यहां तक  लगभग सीडीपीओ भी ! सेविका व सहायिका की  मांग हमें सरकारी कर्मचारी घोषित की जाय ,इन्हें मानदेय नहीं वेतन दी जाय ,मातृत्व अवकाश व चिकित्सकीय अवकाश दी जाय , रिटायरमेंट की उम्र 65 की जाय ,मीनी आंगनबाड़ी केन्द्र की सेविका को सारी सुविधा सेविका की दी जाय आदि 16 सुत्री थी !

महसचिव के अनुसार सेविका से केन्द्र सरकार व राज्य सरकार पूरक पोषाहार ,पोषण व स्वास्थ्य शिक्षा ,स्वास्थय जाँच , टीकाकरण , रेफरल सेवा , शाला पूर्व शिक्षा समेत  6 (छः) सेवायें ली ही जा रही है,  इसके अलावा इनसे समय समय पर निर्वाचन के कार्य ,जनगणना के कार्य व ग्राम पंचायत स्तरीय कार्य आदि भी करवायी जाती है !आज जहाँ सरकार महिलाओं के लिए कह रही है कि हम इनके हितों के लिये शराबबंदी जैसे कानून बनायें हैं उसी तरह सेविका – सहायिका के लिए भी कानून बनाकर इनके सरकारीकरण पर ध्यान देने की जरूरत है जिसके लिये लाखों महिलायें (सेविका -सहायिका ) बिहार में  धरना पर 54 दिनों से थी !
संघ के महासचिव कुमार विन्देश्वर के मुताबिक कल 17 मई को संघ के  महासचिव व अध्यक्षा द्वारा हड़ताल के बिषय पर प्रेस कांफ्रेंस कर  हड़ताल तोड़ने से संबंधित  विधिवत जानकारियाँ दे दी जायेगी ! अब लाखों बिहार की सेविका व सहायिका को संध व सरकार की लिखित आदेश की जरूरत है हड़ताल के बाद काम पर लौटने के लिये !
*देखना यह है कि लिखित आदेश कार्यालय को कब तक मिल पाता है*!