कहो तो कह दूंः प्रदेश में शराब बंदी पर क्यों मौन हैं बड़े नेता?
बृजेश विजयवर्गीय (लेखक)
राजस्थान। प्रदेश में शराबबंदी आंदोलन ने गति पकड़ ली है अच्छा संकेत है कि जनता अब इस बुराई के खिलाफ सामने है। जनता शराब बंदी चाहती है लेकिन प्रदेश में सरकार है कि शराब का धंधे को बढ़ावा देने में पीछे नहीं है। महिलाओं ने राज्य में कई जगह शराब के ठेके बंद करा दिए। कोटा में भी आंेदालन में महिलाऐं आग आ रही है। कोटा में अच्छी खबर है कि मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री पंकज मेहता ने भी इसके खिलाफ जंग में उतरने का निर्णय किया है। आश्चर्य है कि नैतिक मूल्यों की दुहाई देने वाली भाजपा के किसी नेता ने शराब बंदी का खुलकर विरोध नहीं किया। अन्य प्रदेशों में भाजपा के लोग शराबबंदी के समर्थन में है। जनता को शराबबंदी के लिए आंदोलन करना पड़े और सरकार शराब कारोबारियों के समर्थन में दिखे इससे बड़ा दुर्भाग्य प्रदेश का क्या होगा। ऐसा नहीं है कि प्रदेश में मुख्य मंत्री और उनकी सरकार के सलाहकार इनसे अनभिज्ञ हैं। लेकिन श्राब बंदी के लिए साहस नहीं जुटा पा रहे। इसके लिए बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार से सीखा जा सकता है। कि बिना श्राब बेचे भी राजस्व कमाया जाता है। वैसे शराब से राजस्व कमाना बुद्धिमानी नहीं है। खैर जनता जागृत हो रही है। कभी तो नेताओं की नींठ टूटेगी।




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