*इंटरमीडिएट रिजल्ट से छात्रों ने आक्रोश जताते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और अशोक चौधरी शिक्षा मंत्री का पुतला फूंका*
👈कुंज बिहारी शास्त्री”दैनिक खोज खबर”मधेपुरा👉
वर्तमान में बिहार सिनियर सेकेंडरी एग्जामिनेशन बोर्ड ने पूरे बिहार में केवल 35% ही छात्रों का रिजल्ट देखकर अपनी ओर आम जनों की नजर खींचने का काम किया है। इससे जाहिर है कि प्रदेश के अन्य महाविद्यालय, 10+ टू विद्यालय में या तो पढ़ाई नहीं होती या सरकार के द्वारा छात्रों के भविष्य के साथ गलत मूल्यांकन कर खिलवाड़ की गयी है ।पूरे प्रदेश में केवल 35% ही रिजल्ट देकर एक इतिहास बिहार को मिला है। जाहिर सी बात है कि बिहार के कला संकाय के टॉपर गणेश कुमार जिन्हें 70 अंक में 65अंक मिल जाना ?

यह भी एक अचंभा सा बात है। विगत रात्रि अन्य चैनलो पर भी गणेश के विषय में ढेर सारी बातें सामने आई।
बताया गया था 1990 में भी परीक्षा दी थी । इसके पीछे की कहानी जो भी हो ।और पुनः 2016 की परीक्षा में बिहार टॉप कर इतिहास रच दिया है ।गणेश कुमार से पूछताछ के दौरान बताया गया है कि मुझे भी विश्वास नहीं थी कि मैं बिहार टॉपर हो जाऊंगा और जब पत्रकारों ने उनसे पूछा ताल- लय क्या है ?तो सही -सही जवाब देने में भी अटक गए। इतना ही नहीं इनसे जब संगीत के स्वर के साथ गाने के लिए कहा गया तो बिना लय और स्वर का ही मेरा जीवन कोरा कागज नहीं गाना गाया और जांच का विषय बना दिया।

इसी दौरान आज मधेपुरा जिला के चौसा प्रखंड में यहां के असफल छात्रों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रखंड के सड़क मार्ग से घूमते हुए नितीश कुमार मुर्दाबाद अशोक कुमार हाय हाय (शिक्षा मंत्री) के खिलाफ नारेबाजी करते हुए थाना चौक पर आकर दर्जनों छात्रों ने पुतला दहन किया ।
बताते चलें कि *पवन कुमार ने कहा कि मैंने परीक्षा में अच्छी तरह से लिखा था और घर आकर जब उसका मैंने स्वयं मूल्यांकन किया तो मुझे लगा कि मैं पास कर रहा हूं ।लेकिन 4-4 सब्जेक्ट में मुझे असफल कर दी गई* ।साथ ही स्थानीय छात्र *प्रद्युमन ने कहा की मैं सेकंड डिविजन का भागीदारी होने के बावजूद भी मुझे असफल घोषित किया गया है* ।रसायनशास्त्र और भौतिकी में कम अंक देकर मेरे भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है। इसी दौरान गुलशन कुमार ने कहा कि मैं अच्छी तरह से मेहनत की थी। मेरा परिवार गरीबी में रहकर मुझे अच्छी शिक्षा के लिए प्रेरित किया था और काफी मेहनत भी किया था।फल स्वरुप मुझे असफल घोषित किया गया है ।

सौरभ कुमार और निलेश कुमार ने कहा कि सरकार हम लोगों के साथ और मेरे भविष्य के साथ बहुत बड़ा खिलवाड़ किया है, क्योंकि मेरा भविष्य इस अंक के माध्यम से सिमट सा गया है ?और आगे पढ़ाने के लिए भी मुझे रोक रहे हैं। मैं किसे जिम्मेदार ठहराउ । मैंने मेहनत करके पढा था परंतु असफल घोषित होने के बाद मेरा मानसिक संतुलन भी डगमगा गया है। यह प्रश्न सरकार को जाती है कि आखिर क्यों इस तरह के रिजल्ट सामने आई है? इससे जाहिर होता है या तो रिजल्ट सही है या पूर्व में जो अब तक रिजल्ट दी जाती थी उसमें गलती हुई है? स्पष्ट तौर पर कहा जा सकता है सरकार की यह बहुत बड़ी चुनौती साबित हुई कि महाविद्यालय में पढ़ाई नहीं होती अगर होती भी है तो इस तरह का रिजल्ट क्यों? जबकि बिहार में 2015 के परिणामों से टॉपरों का मामला अब तक ठंडा भी नहीं हो पाया था, कि पुनः बिहार में टॉपर की घटना को याद दिलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है ।आखिर किसे जिम्मेदार ठहराया जाए ।यक्ष प्रश्न, आगे के लिए? इस दौरान सैकड़ों असफल छात्रों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और अशोक चौधरी शिक्षा मंत्री का पुतला फूंका।
चौसा निवासी रामाशंकर चौरसिया के पुत्र प्रिंस कुमार ने कहा कि आईआईटी जेईई मेंस की परीक्षा पास कर गया पर बिहार सरकार के गलत नीति के कारण मेरा भविष्य दाव पर लग गया।सरकार हम बच्चों के साथ खिलवाड़ कर रही है।उन्होंने सरकार से सही तरीके से पुनः कॉपी जाँच करने की मांग की है।





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