गरीबो और बेसहारा लोगो की मदद करने वाले आईपीएस की कहानी
आज़ाद नेब
जयपुर 2 जून। भ्रष्टाचार के खिलाफ खुलकर कर रहे है आक्रमक वार।भारतीय पुलिस सेवा के चर्चित एवं दबंग आईपीएस ऑफिसर पंकज चौधरी को लेकर इन दिनों सोशल मीडिया में फिर से चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है, वहीं अपनी दबंग छवि के चलते कई बार ट्रांसफर और बाद में चार्जशीट के दंश झेलने वाले दबंग पंकज चौधरी ने अपना काम हुबहू जारी रखा हैं। वहीं मीडिया में हर रोज अपनी ईमानदार छवि के चलते चर्चित भी रहते हैं अब एक बार फिर से 12 सितम्बर में बूंदी के नैनवा में घटित काण्ड को लेकर चर्चा हुई हैं जिसमें आईपीएस पंकज चौधरी के पक्ष में सोशल मीडिया पर *संक्षिप्त ब्रीफ* करके कुछ यूं ट्रेड चल रहा हैं।
नैनवा (बुदीं) चार्जशीट
साम्प्रदायिक तनाव
*संक्षिप्त ब्रीफ़*
12 सितम्बर 2014 बुन्दी जिले के नैनवा में घटित साम्प्रदायिक तनाव की घटना सुनियोजित एवं प्रायोजित थी।
शुक्रवार का दिन था, मुस्लिम समाज के लोग नमाज़ के लिए स्थानीय मस्जिद में बड़ी तादात में आते है। उस दिन पुलिस अधीक्षक  कार्यालय में प्रत्येक माह होने वाली जिले की क्राइम मीटिंग थी। जो पन्द्रह दिन पहले से तय था। नैनवा संवेदनशील रहा है। पंचायती चुनाव निकट था इसको लेकर साजिश करने वालों ने 12 सितम्बर को चुना था। बुंदी से नैनवा तीन घंटे की दुरी पर है। कुल दुरी लगभग 70 किमी।अपराधियो एवं षड्यन्त्र करने वालो को पता था कि बुंदी से नैनवा तक फ़ोर्स आने में समय लगेगा। क्राइम मीटिंग में जिले के शीर्ष अधिकारी बुंदी मुख्यालय पर व्यस्त रहेगें।
वर्ष 2012 मार्च माह में नैनवा में कांग्रेस सरकार के समय साजिश करने वालो ने एक मज़ार एवं अन्य तोड़फोड़ किया था। इसका मुख्य अभियुक्त सीताराम था जिसका अन्य आठ लोगों के साथ चालान हुआ था। वर्ष 2013 दिसम्बर बीजेपी सरकार राज्य में बनी। ये सारे अभियुक्त हिन्दु संगठनों से जुड़े थे। 12 सितम्बर 2014 को पुन: सीताराम एवं अन्य ने साजिश के तहत साम्प्रदायिक दंगा कराना चाहा जिसे समय रहते पुलिस ने सख़्ती करते हुये रोक दिया।
पुलिस अधीक्षक पंकज चौधरी ने निर्दोष मुस्लिमों पर कारवाई से इनकार कर दिया। अपराधियों पर तीन मुकदमें दर्ज हुये और जेल भेजे गये। इनको बाहर निकालने के लिए घटना के चार दिन बाद ही एसपी पर दबाव बनाये जाने लगा जिसमें शीर्ष पुलिस अधिकारियों, शासन सचिवालय के एक सीनियर आईएएस की मुख्य भूमिका थी। कुछ जनप्रतिनिधिओं ने भी दबाव बनाते हुये इनको अपना कार्यकर्ता बताते हुये तत्काल छोड़ने के लिए एसपी पर दबाव बनाया था। अपराधियों को बाहर निकालने में सफल न होने पर अंतत: पुलिस अधीक्षक पंकज चौधरी को पहले एपीओ फिर दिल्ली तबादला और फिर घटना के लगभग एक वर्ष बाद 21.09.15 को चार्जशीट दी गयी और अंत में लापरवाही मानते हुये केन्द्र को राज्य सरकार ने अनुशंसा कर दी। इस चार्जशीट का बचाव करने के लिए दो अन्य चार्जशीट राज्य सरकार की अनुशंसा पर पंकज चौधरी को थोपी गयी।
आईपीएस पंकज चौधरी ने राज्य के भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। प्रधानमंत्री जी एवं महामहिम राष्ट्रपति को भी निवेदन किया। सोशल मीडिया में चल रहे इन तथ्यों पर नजर घुमाये तो मामला काफी संगीन लग रहा हैं तो वहीं काफी लोगों पर उंगलिया भी उठाना लाज़मी हैं। इस तथ्यों या बातों में कितनी सच्चाई हैं ये तो शायद ईमानदारी से जांच होने के बाद ही पता चलेगा। लेकिन इतना तय हैं की काफी समय से दबंग आईपीएस अपने क्षेत्र में भ्रष्टाचार के खिलाफ जमकर हल्ला बोल रहे हैं, वहीं टाइगर के नाम से भी मशहूर हैं।