हल्लाबोल : दरौंदा विधानसभा क्षेत्र की जनता ने परिवारवाद , भष्टाचार, संगठन के बड़े नेताओं के अदूरदर्शी फैसले व गुंडागर्दी के खिलाफ मतदान किया है
✍नवीन सिंह परमार

सिवान :
♨दरौंदा विधानसभा क्षेत्र के उप चुनाव में एक लाख 40 हजार 328 मतदाताओं EVM से तो 105 मतदाताओं ने पोस्टल मत पत्र से मतदान किया था ।
मतगणना के बाद प्राप्त आकड़ों के अनुसार 36.48 % मतदाताओं ने निर्दलीय उम्मीदवार कर्णजीत सिंह उर्फ व्यास सिंह के लिए मतदान किया हैं । वहीं जदयू प्रत्याशी अजय कुमार सिंह के लिए 17.05 % , राजद के प्रत्याशी उमेश सिंह के लिए 14.89 % , निर्दलीय उम्मीदवार शैलेन्द्र कुमार यादव के लिए 12.03 % तो निर्दलीय उम्मीदवार विजय सिंह कुशवाहा के लिए 04.17 % मतदाताओं ने मतदान किया हैं । वही इस बार दरौंदा में लगभग 02 % मतदाताओं नोटा बटन का उपयोग किया हैं ।
परमार मीडिया सीवान के चुनाव विश्लेषक मनोज कुमार सिंह ने बताया कि इस बार दरौंदा विधानसभा क्षेत्र के उप चुनाव में परिवारवाद, भष्टाचार , गुंडागर्दी व संगठन के बड़े नेताओं के खिलाफ मतदान किया है ।
गौरतलब हो कि इस उप चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी कर्णजीत सिंह उर्फ व्यास सिंह जो सीवान भाजपा के कद्दावर युवा नेता हैं । उन्होंने अपने संगठन के बड़े नेताओं के द्वारा किए गए गलत फैसले के खिलाफ हल्लाबोल बोलते हुए सीवान के भाजपा कार्यकर्ताओं के भरोसे चुनाव मैदान में उतार कर कुल 51 हज़ार 223 मत प्राप्त कर के NDA के प्रत्याशी जदयू के बाहुबली नेता अजय कुमार सिंह को लगभग 27 हज़ार मतों से पराजित कर के दरौंदा विधानसभा क्षेत्र में एक नया कृतिमान लिख दिया । जदयू प्रत्याशी जो सीवान सांसद कविता सिंह के पति भी हैं ।
परमार मीडिया सीवान के चुनावी आंकड़ों के विशेषज्ञ डॉक्टर सुधीर कुमार सिंह उर्फ नन्हे जी की माने तो इस उप चुनाव में सत्ताधारी दल के प्रत्याशी अजय सिंह को मात्र 23 हज़ार 944 मत ही प्राप्त हुआ, जो व्यास सिंह के जीत वाले वोट से भी कम है । यही नहीं जदयू प्रत्याशी अजय कुमार सिंह के 23944 हज़ार व राजद प्रत्याशी उमेश सिंह के 20911 हज़ार वोटों को भी मिला दिया जाता तो भी के व्यास सिंह को 6368 अधिक वोट मिले हैं और उनकी जीत सुनिश्चित थी ।
वही चुनाव विश्लेषक मनोज सिंह की माने तो इस उप चुनाव के परिणाम को देखा जाए तो दरौंदा विधानसभा क्षेत्र की जनता ने बिहार के दोनों गठबंधन के बड़े नेताओं को आईना दिखाने का काम किया है । इस चुनाव में यहां की जनता ने इन दोनों गठबंधन के लगभग सभी बड़े नेताओं नीतीश कुमार, सुशील कुमार मोदी, रामविलास पासवान, आर सी पी सिंह, तेजस्वी यादव एवं मंगल पाण्डेय जैसे सरीखे नेताओं को सोचने के लिए निश्चित ही बाध्य किया है ।




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