सारण के लिए खास दिन होगा जब कॉमनवेल्थ गेम्स 2018 में भिखारी ठाकुर रचित गीतो को अपने सुरो से सजायेंगी भोजपुरी की चर्चित लोकगायिका कल्पना 

डोरीगंज ( छपरा ) : अप्रैल में ऑस्ट्रेलिया के ब्रिसबेन क्वींसलैण्ड गोल्ड कोस्ट शहर में आयोजित होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स 2018 भोजपुरी  के लिए सबसे अहम व एक खास दिन  साबित होनेवाला है ।
जहाँ भोजपुरी के शेक्सपीयर व भोजपुरी लोक संगीत कला के संवाहक मानेजाने वाले भिखारी ठाकूर रचित गीतो को अपने सुरो से सजायेंगी भोजपुरी की चर्चित लोकगायिका कल्पना पटवारी ।
शुक्रवार को टेलीफोनिक संवाद के  जरिए मुखातिब होते हुए  कल्पना  ने मीडिया को बताया कि आस्ट्रेलिया मे आयोजित  कॉमनवेल्थ गेम्स 2018  के समापन समारोह के अवसर पर  आयोजकों के द्वारा उन्हे आमंत्रित किया गया है जहाँ वह भिखारी ठाकुर रचित गीतो व असम की लोक संस्कृति पर आधारित अपना एक विशेष  कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगी ।
अपनी संक्षिप्त वार्ता के दौरान कल्पना ने बताया  कि यह उनके लिए चौथा मौका  है जब वह भोजपुरी लोक -संगीत को अंतरराष्ट्रीय पटल पर प्रस्तुत करने जा रही है जबकि इससे पूर्व ‘द लिजेंसी  ऑफ भिखारी ठाकुर’को मॉरीशस में वहां के प्रधानमंत्री के द्वारा  लोकार्पित भी किया  जा चूका है जिसके बाद लैटिन अमेरिका और नार्वे में उन्होंने भिखारी ठाकुर के गीतों पर अपना कार्यक्रम  प्रस्तुत  कर चूकी है कल्पना ने बताया कि आज के दौर में भोजपुरी लोक संगीत की प्रासंगिकता बढ़ी है. जिसे अंतरराष्ट्रीय पटल पर खूब  सराहा जा रहा है ।
जबकि यह उल्लेखनीय है कि कल्पना पटवारी मूलत:  असम की रहने वाली हैं. भोजपुरी गीत संगीत से उनका जुड़ाव 2002 में हुआ जब मशहूर म्यूजिक कंपनी टी सीरिज ने उन्हें लॉन्च किया. प्रारंभिक दिनों में बाबा बैद्यनाथ को समर्पित एल्बम ‘भंगिया ना पिसाई ए गणेश के पापा’ और पचरा गीत एल्बम भैरो जी के दिदिया’ आदि लोकप्रिय गीतो ने भोजपुरी लोक संगीत की दुनिया मे कल्पना को एक मुकम्मल  पहचान दी वही कालांतर में कल्पना ने कई सोलो एल्बम भी किए जिसमे ‘गवनवा ले जा राजा जी’ गीत के जरिए भी लोगों के दिलो में अपनी खास  जगह बनायी कल्पना के मुताबिक वह अबतक 30 भाषाओं में दस हजार से भी अधिक गीतों को अपनी आवाज दे चूकी  है ।

कल्पना  भिखारी ठाकुर को  अपना आदर्श मानती है।  वही भूपेन हजारिका के लोक संगीत की छत्रछाया मे खुद को पली बढी बताती है।  उनके मुताबिक शायद यही वजह रही की भोजपुरी गीत-संगीत में उन्होंने भूपेन हजारिका के सामाजिक सरोकार और चिंतन की तलाश शुरू की।
आरा के बखोरापुर काली मंदिर में एक कार्यक्रम के दौरान उनकी मुलाकात रामाज्ञा राम से हुई जो भिखारी ठाकुर की नाच मंडली के एक अहम किरदार थे । कल्पना ने बताया कि यहीं से भिखारी ठाकुर के साथ उनका संबंध बना जिसकी परिणति ‘द लिजेंसी  ऑफ भिखारी ठाकुर’ के रूप में 2012 में हुई। उन्होंने यह भी बताया कि हाल ही में ‘एंथोलॉजी और बिरहा’जारी की गई है. यह म्यूजिक एल्बम बिरहा के विभिन्न स्वरूपों पर केंद्रित है।
वही भोजपुरी गीतो मे अश्लीलता के चलन से जुड़े एक सवाल  के जवाब में कल्पना ने बताया  कि सस्ती लोकप्रियता की दौर मे फूहड़पन व अश्लीलता भोजपुरी  संस्कृति को बर्बाद कर रही है जिसका वह खुले मंच से विरोध करती है ।
केंद्र सरकार के संगीत नाटक अकादमी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अकादमी द्वारा भिखारी ठाकुर की जयंती के मौके पर उनके पैतृक गांव कुतुबपुर में कार्यक्रम का आयोजन किया जाना भोजपुरी के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय है। इस आयोजन में शामिल होकर उन्हे गौरव का  एहसास  हुआ उनके मुताबिक ऐसे आयोजनो से भोजपुरी को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल होने की संभावनाएँ भी अब प्रबल हो उठी है  । जिसके  लिए वह केंद्र सरकार से भी इस दिशा मे पहल  की मांग करेंगी।

#साभार :मनोरंजन पाठक