गोरखपुर :पुलिस के हत्थे चढ़ा 40 हजार का इनामी बदमाश दुर्गा यादव
 #संजय कु गुप्ता 
बांसगांव(गोरखपुर)
एसटीएफ लखनऊ तथा बासगांव पुलिस के संयुक्त प्रयास से बीती रात क्षेत्र के बढ़नी तिराहे से 40 हजार के इनामी बदमाश दुर्गा यादव को गिरफ्तार कर लिया गया। बताते चलें कि करीब डेढ़ वर्ष पूर्व क्षेत्र के धौंसा गांव में भूमि विवाद को लेकर दो पक्षों के बीच हुई गोलीबारी में दुर्गा यादव के भाई  बीडीसी सहित दो की मौत हो गयी थी| 
   
      बांसगांव थाना क्षेत्र के ग्राम धौंसा के गजारी टोला निवासी प्रेमसागर तिवारी तथा शेषनरायण तिवारी, श्यामनरायन तिवारी, सिद्धेश्वर नरायन तिवारी एवं श्यामाचरन तिवारी का 21 डि0 का एक बाग का नम्बर था| इस संयुक्त भूमि का कानूनी बंटवारा नहीं किया गया था| इस बीच शेषनरायन वगैरह ने एक माह पूर्व अपने हिस्से की पांच डि0 भूमि को गांव के ही राजकुमार चौहान को बैनामा लिख दिया था|जबकि उक्त भूमि को प्रेमसागर तिवारी ने कंटीले तार के बाड़़ से घेर रखा था। इधर राजकुमार बैनामशुदा भूमि पर कब्जे करने के लिये लेखपाल तथा गांव के प्रधान दुर्गा प्रसाद यादव सहित दर्जनों लोगों के साथ मौके पर पहुंचा था कि इसी दौरान पैमाइस को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद शुरू हो गया था| इस बीच हुई गोलीबारी में 60 बर्षीय प्रेमसागर तिवारी पुत्र रामनोहर तिवारी तथा दुर्गा यादव के 35 बर्षीय भाई दीवाकर उर्फ सिन्टू यादव की मौके पर ही मौत हो गयी।
श्रीमती लालती पत्नी स्व0 प्रेमसागर तिवारी निवासी गजारी की तहरीर पर मुकामी पुलिस ने शेषनाथ तिवारी व ग्राम प्रधान दुर्गा यादव सहित आठ नामजद लोगों के विरूद्ध हत्या तथा बलबा की धारा १४७, १४८, १४९, ३०२, ५०४ का मुकदमा दर्ज किया था | सभी आरोपी गिरप्तार हो चुके थे जबकि  दुर्गा यादव फरार चल रहा था| 
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दुर्गा को देखने थाने पर उमड़ पड़ी भीड़
बांसगांव। दुर्गा यादव की गिरफ्तारी की खबर जंगल में लगी आग की तरह क्षेत्र में फैलते ही इस कड़ाके की ठण्ड में उसके शुभेच्छुओं का थाने पर तांता लग गया। प्रत्क्षदर्शियों के अनुसार करीब 150 दुपहिया और चार पहिया वाहनों से पहुंचे लगभग 4-5 सौ की संख्या में थाने पर उसके शुभचिंतक तब तक डटे रहे जब तक की उसे जेल के लिए रवाना नहीं कर दिया गया। भीड़ को देखकर पुलिस की सांसे बढ़ती जा रहीं थीं। सूत्रों की माने तो इस इनामी बदमाश के समर्थन में आयी भीड़ में असलहों से लैश कई शातिर बदमाश भी शामिल थे, मगर पुलिस ने उनसे नजरें फेरे रखना ही मुनासिब समझा।