
श्री मदभागवत-कथा ज्ञान महायज्ञ आत्म-चिंतन, प्रेम, भक्ति, मानवता व विश्व-शांति व कल्याण की कामना के संदेश के साथ सम्पन्न

मांझी (सारण) : प्रखंड के चकिया गांव में आयोजित राधे-कृष्ण मंदिर निर्माण सह भूमि-पूजन को लेकर आयोजित सात दिवसीय श्री मदभागवत-कथा ज्ञान महायज्ञ आत्म-चिंतन, प्रेम, भक्ति, मानवता व विश्व-शांति व कल्याण की कामना के संदेश के साथ सम्पन्न हो गया। जिसमें महामंगल पुरी धाम सूरत गुजरात से पधारे श्री श्री 1008 श्री सूर्य नारायण दास जी महाराज तथा श्री सुमित कृष्ण ठाकुर जी डाकोर के द्वारा श्रद्धालु श्रोताओं को श्रीमद् भागवत अमृत रस का पान कराया गया। अपने कथा में परम पूज्य महाराज जी कथा सुनाते हुए कहा कि मानव-जीवन सर्वश्रेष्ठ है। क्योंकि मानव ही वह प्राणी है जो बोल सकता है,विचार और अविष्कार भी करता है। मनुष्य के भीतर की करुणा चेतना और सद्भाव वास करते हैं। समानता हर प्राणी योनियों के चार उद्देश्य होते हैं जैसे सोना अपनी भूख मिटाना तथा अपने घर का निर्माण करना और संतान उत्पन्न करना। किंतु मनुष्य योनि अपनी भूख मिटाने के साथ दूसरे की भी चिंता करती है। जिस दिन मनुष्य की मनुष्यता लुप्त हो जाएगी उस दिन वह भी पशु बन कर रह जाएगा । अंतिम दिन कथा व प्रवचन का श्रवण करने के लिए श्रद्धालुओं की भाड़ी भीड़ उमड़। कथा व प्रवचन सुनकर पुरुष एवं महिला श्रद्धालु भाव विभोर हो गये। कथा में अंतिम दिन श्री कृष्ण और सुदामा का मिलाप देख कर कई श्रद्धालु तो रोने को विवश हो गए। प्रतिदिन रात में लोगों ने कृष्ण -लीला का आनंद उठाया। रविवार को विशाल भंडारे के साथ सात दिवसीय महायज्ञ सम्पन्न हो गया।




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