विश्व क्षय रोग दिवस के अवसर पर माँ यूथ ऑर्गेनाईजेशन द्वारा जागरूकता के लिए किया गया डोर-टू-डोर कैम्पेन
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छपरा : विश्व क्षय रोग दिवस के अवसर पर जागरुकता फैलाने के लिए माँ यूथ आर्गेनाईजेशन के सदस्यों द्वारा विभन्न गांवों में जाकर डोर-टू-डोर जागरूकता फैलाई गई । इनमें जलालपुर प्रखण्ड के बंगरा, चौखड़ा, गम्हरिया; बनियापुर प्रखण्ड के हुरहड़ा, उस्ती, पिठौरी, बलुआ; नगरा प्रखण्ड के कटेशर तथा मढ़ौरा प्रखण्ड के रामपुर गांव के विभिन्न घरों में जाकर टी बी के बारे में बताया गया।

इन सदस्यों के डोर-टू-डोर कैम्पेन के लिए जाने से पूर्व सदस्यों को क्षय रोग( टी बी) के बारे में संगठन की सचिव जया सोनल द्वारा बताया गया कि टीबी यानी ट्यूबरोकलोसिस को हिंदी में क्षयरोग कहते हैं। दो सप्ताह या उससे अधिक समय से लगातार खांसी और उसके साथ बलगम आना, बुखार, विशेष रूप से शाम को बढ़ने वाला बुखार इसके प्रमुख लक्षण हैं। इसके अन्य लक्षणों में वजन का घटना, भूख कम लगना, सीने में दर्द, बलगम के साथ खून आना शामिल है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की अधिसूचना के मुताबिक कोई चिकित्सक, अस्पताल या मेडिकल स्टोर वाले किसी भी टीबी मरीज की जानकारी छुपा नहीं सकते। उनके पास आने वाले हर टीबी मरीज की जानकारी उन्हें टीबी अस्पताल या संबंधित स्वास्थ्य केंद्र में देनी होगी। ऐसा न करने पर भारतीय दंड संहिता की धारा 269 और 270 के तहत उन्हें छह माह से लेकर दो साल तक की सजा हो सकती है और जुर्माना भी भरना पड़ सकता है।

यह सच है कि टीबी एक संक्रामक रोग है. रोगियों के खांसने और थूकने से यह रोग प्रसारित होता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि यह रोग दूर नहीं हो सकता. टीबी का इलाज संभव हैं. इसके अलावा यह छूने या हाथ मिलाने से नहीं फैलती. टीबी होने पर समय से दवाई लेने और कोर्स पूरा करने के साथ रोगी को कुछ और सावधानियां रखनी चाहिए. हमेशा मुंह पर कपड़ा रखकर ही खांसना चाहिए. कभी खुले में नहीं थूकना चाहिए. कोर्स पूरा होने के बाद बलगम की जांच जरूर करानी चाहिए, जिससे पता चल सके कि रोग सही हुआ है या नहीं.

सरकार ने एक अप्रैल 2018 से टीबी रोगी को हर महीने 500 रुपए दिया जाना भी तय किया है, ताकि वह अपने खान-पान का ध्यान रख सके। इस समय डब्ल्यूएचओ द्वारा निर्धारित डॉट्स प्रणाली के तहत टीबी का इलाज किया जा रहा है, जिसमें उचित देखरेख में रोगी की दवा की जाती है। टीबी की अलग-अलग किस्म की पहचान के लिए अब आधुनिक विधियां विकसित हो चुकी हैं। निक्षय नामक ऑनलाइन साफ्टवेयर से अधिक से अधिक मरीजों की पहचान करके उनका तुरंत इलाज शुरू किया जाने लगा है। ऐसे ही तमाम प्रयासों और स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं के चलते टीबी के रोगियों की संख्या और उनकी वृद्धि में कमी तो आई है, फिर भी मंजिल अभी बहुत दूर है।

संगठन के अध्यक्ष शशि सिंह ने बताया कि यह टीबी के प्रति समाज में गहरे बैठे पुराने डर को खत्म करने की एक कोशिश है। यह डर अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हो पाया है। बॉलीवुड फिल्मों में टीबी की बीमारी अब बीते जमाने की बात हो गई है. असल ज़िन्दगी में भी यह दिन जल्दी देखने को मिले, यही कामना है! इस कैम्पेन में सुधांसु सिंह ,भीम महतो, मृत्युंजय कुशवाहा, रामलायक प्रसाद ,राजू साह, अमन सिंह,रामकुमार , विक्की साह आदि ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।