भोजपुरी के शेक्सपियर भिखारी ठाकुर की 49 वीं पुण्यतिथि मनाई गई

कुमुद रंजन सिंह की रिपोर्ट-
हरनौत, गौतम नगर-नालंदा : 10 जुलाई 2020 दिन शुक्रवार को गौतम नगर-रेलवे स्टेशन हरनौत के पास समाजसेवी पप्पू जी के आवास पर “महापद्मनंद कम्युनिटी एजुकेटेड एसोसिएशन (नालंदा)” के तत्वावधान में भोजपुरी के समर्थ लोक कलाकार, महान रंगकर्मी, लोक जागरण के सन्देश वाहक, लोक गीत तथा भजन कीर्तन के अनन्य साधक, भोजपुरी के शेक्सपियर भिखारी ठाकुर की 49 वीं पुण्यतिथि मंगल दीप जलाकर तथा पुष्पांजलि अर्पण कर मनाई गई।
इस पूण्यतिथि में सभी कार्यक्रम कोरोनावायरस संक्रमण के चलते सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए किया गया।
समारोह की अध्यक्षता समाजसेवी दीपक कुमार ने किया।
मौके पर पद्मश्री भिखारी ठाकुर के तैल चित्र पर माल्यार्पण व श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कार्यक्रम के मुख्य अतिथि समाजसेवी शिक्षाविद् राकेश बिहारी शर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा कि भोजपुरी के शेक्सपीय कहे जाने वाले लोक कलावंत पद्मश्री भिखारी ठाकुर की आज 49 वीं पुण्यतिथि है। वह भोजपुरी के समर्थ लोक कलाकार होने के साथ ही कुशल रंगकर्मी, लोक जागरण के सन्देश वाहक, नारी विमर्श और दलित विमर्श के उद्घोषक, लोक गीत तथा भजन कीर्तन के अनन्य साधक भी रहे हैं। 18 दिसंबर 1887 को छपरा के कुतुबपुर दियारा गांव में एक निम्नवर्गीय नाई परिवार में जन्म लेने वाले पद्मश्री भिखारी ठाकुर ने विमुख होती भोजपुरी संस्कृति को नया जीवन दिया। भोजपुरी के नाम पर सस्ता मनोरंजन परोसने की परंपरा भी उतनी ही पुरानी है, जितना भोजपुरी का इतिहास। उन्होंने भोजपुरी संस्कृति को सामाजिक सरोकारों के साथ ऐसा पिरोया कि अभिव्यक्ति की एक धारा भिखारी शैली जानी जाने लगी। आज भी सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार का सशक्त मंच बन कर जहां-तहां भिखारी ठाकुर के नाटकों की गूंज सुनाई पड़ ही जाती है। पद्मश्री भिखारी ठाकुर जी लोक कलाकार ही नहीं थे, बल्कि जीवन भर सामाजिक कुरीतियों और बुराइयों के खिलाफ कई स्तरों पर जूझते रहे। उनके अभिनय और निर्देशन में बनी भोजपुरी फिल्म ‘बिदेसिया’ आज भी लाखों-करोड़ों दर्शकों के बीच पहले जितनी ही लोकप्रिय है। उनके निर्देशन में भोजपुरी के नाटक ‘बेटी बेचवा’, ‘गबर घिचोर’, ‘बेटी वियोग’ का आज भी भोजपुरी अंचल में मंचन होता रहता है। इन नाटकों और फिल्मों के माध्यम से भिखारी ठाकुर जी ने सामाजिक सुधार की दिशा में अदभुत पहल की। फिल्म बिदेसिया की ये दो पंक्तियां तो भोजपुरी अंचल में मुहावरे की तरह आज भी गूंजती रहती हैं। भिखारी ठाकुर जी ने कुल 29 पुस्तकें लिखीं। आगे चलकर वह भोजपुरी साहित्य और संस्कृति के समर्थ प्रचारक और संवाहक बने। बिदेसिया फिल्म से उन्हें खूब प्रशंसा मिली।
भिखारी ठाकुर जी अक्सर अपने नाटकों में सूत्रधार बनते और अपनी बात बड़े चुटीले अंदाज़ में कह जाते। अपने अंतिम समय तक सामाजिक के लिए भी उन्होंने समाज के कल्याण के लिए बेहतरीन नाटक दिए। कोई उन्हें भरतमुनि की परंपरा का पहला नाटककार मानता हैं तो कोई भोजपुरी का भारतेंदू हरिश्चंद्र। महापंडित राहुल सांकृत्यायन ने तो उन्हें “भोजपुरी का ‘शेक्सपियर” की उपाधि दे दी। इसके अलावा उन्हें कई और उपाधियां और सम्मान भी मिले। भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री पुरस्कार से भी सम्मानित किया। इतना सम्मान मिलने पर भी भिखारी गर्व से फूले नहीं, उन्होंने बस अपना नाटककार जिंदा रखा ।
कार्यक्रम में अपना विचार व्यक्त करते हुए एसोसिएशन के दीपक कुमार ने कहा कि भिखारी ठाकुर समाज के अनगढ़ हीरा थे। उन्होंने समाज में फैली कुरीतियों पर नाटक व गायन के माध्यम से करारा प्रहार किया। भिखारी ठाकुर ने अपने समय में भोजपुरी को राष्ट्रभाषा के रूप में स्थापित करने के लिए राष्ट्रीय आंदोलन की थी। उक्त भाषा को लेकर उन्होंने सामाजिक एकता व अखंडता का भी प्रयास किया था भिखारी ठाकुर जी एक आम आदमी जिसने भोजपुरी को बना दिया खास।
समाजसेवी अरविंद कुमार ने कहा- भिखारी ठाकुर के व्यक्तित्व में कई आश्चर्यजनक विशेषताएं थी। मात्र अक्षर ज्ञान के बावजूद पूरा रामचरित मानस उन्हें कंठस्थ था। शुरुआती जीवन में वह रोजी-रोटी के लिए अपना घर-गांव छोडकर खड़गपुर चले गए थे। कुछ वक्त तक वहां नौकरी भी की। ये लगभग तीस वर्षों तक पारंपरिक पेशे से जुड़े रहे। अपने गांव लौटे तो लोक कलाकारों की एक नृत्य मंडली बनाई। जिसके बाद वह रामलीला करने लगे। उनकी संगीत में भी गहरी अभिरुचि थी। वह कई स्तरों पर कला-साधना रचना में भी लगे रहे।
समाजसेवी पप्पु शर्मा ने भिखारी ठाकुर के बेटी बचाओ नारे के बारे में बोलते हुए कहा कि आज की वर्तमान सरकार इस विषय पर काम कर रही है, जबकि भिखारी ठाकुर अपने समय में गांव-गांव, घर-घर जाकर लोगों को बेटियों को बचाने के नारे को जन-जन तक पहुंचाने का काम किया। आज के वर्तमान परिवेष में इनके पदचिन्हों पर चलते हुए समाज जागरूक करने की जरूरत है।
समाजसेवी मुकेश कुमार ने बताया कि भिखारी ठाकुर जी ने जो बेटी बचाओ का अलख जगाया था उसे भुलाया नहीं जा सकता। उनके द्वारा गाये गीत आज भी समाज को आईना दिखाने का काम कर रहा हैं। भोजपुरी में उनके द्वारा किये गए योगदान के वजह से ही उन्हें भोजपुरी का शेक्सपीयर कहा जाता हैं।
इस दौरान समाजसेवी रामाश्रय शर्मा, शैलेन्द्र कुमार, रामप्रवेश ठाकुर, रविंदर शर्मा, वालेश्वर शर्मा, राजेश ठाकुर सहित अन्य लोगों ने भाग लिया।




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