माह रमजानुल मुबारक के आखिरी जुम्मा जुम्मातुलविदा की नमाज अकीदत के साथ अदा

संजय कुमार सुमन

 संपादक,दैनिक खोज खबर 

नेकियोंबरकतों के मुकद्दस माह रमजानुल मुबारक के आखिरी जुम्मा जुम्मातुलविदा की नमाज शुक्रवार को जिले भर में अकीदत के साथ अदा की गई ।दोपहर एक बजे पहली अजान के साथ ही मस्जिद नमाजियों से पूरी तरह भर गई। जामा मस्जिद में जुमातुलविदा की नमाज मौलाना अबुल कलाम की अगुवाई में अदा की गई।जुम्मातुलविदा की नमाज में रमजान माह की इबादत को कुबूल फरमाने के लिए खुदा की बारगाह में दुआ मांगी गई। मौलाना कलाम ने कहा कि जरूरतमंदों को ईद की नमाज से पूर्व जकात, सदका और फितरा अदा कर दें ताकि वे भी ईद की खुशी में शामिल हो सके।  इस मौके पर मौलाना अबुल कलाम  ने तकरीर पेश की  और खुत्बा पढ़ा।  इसी प्रकार मधेपुरा मुख्यालय समेत विभिन्न प्रखण्ड के  प्रमुख जामा मस्जिदों में जुम्मातुलविदा की नमाज अदा की गई।

राततक बाजारों में रही भीड़
रमजान का महीना अब सामप्त होने वाला है। कुछ ही दिनों में ईद के चांद का दीदार होगा और मुस्लिम समाज इस त्यौहार को धूमधाम से मनाएंगे। इस पवित्र माह में हजारों की संख्या में मुस्लिम समाज के लोगों ने रोजा रखकर अपनी भक्ति की शक्ति प्रदर्शन किया है। अब ईद का दिन नजदीक होने की संभावना के चलते बाजार भी गुलजार नजर आने लगे हैं। ईद की तैयारियों के बीच रात तक बाजारों में भीड़ रही। यहां युवाओं में काफी उत्साह देखा गया। जिले के प्रमुख बाजारों में खरीदारी के लिए लोग रात तक जुटे रहे। 
ईद के दिन परोसे जाने वाली लज्जतदार सेवई का स्वाद किसे नहीं याद होगा। तीस दिन के रोजे के बाद मुस्लिम घरों में ईद की खुशी में इसे बनाया जाता है। हफ्ते भर तक किमामी सेवई की दावत का सिलसिला चलता ही रहता है। ईद का त्योहार नजदीक आते ही बाजार में सेवइयों की दुकानें भी सज-धज कर तैयार हैं। वहीं सबसे अधिक परेशानी बच्चों के कपड़े खरीदने में हो रही है। मन-मुताबिक कपड़ों की तलाश में दिनभर माता-पिता दुकानों की खाक छानते फिर रहे हैं। खुद के कपड़ों के अलावा लोगों को ईद के लिए ढेर सारी खरीदारी करनी है। इन्हीं में सबसे अहम है सेवई क्योंकि इसके बगैर मेहमानों की खातिरदारी ही अधूरी होगी।

 

ईद की तैयारियां शुरू, बाजार हुआ रौशन

 शहर के मुख्य बाजार क्षेत्र में जहां ऋगार से लेकर वस्त्रालयों पर इन दिनों मुस्लिम युवाओं की अधिक भीड़ देखी जा रही है तो वहीं मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों के अलावा शहर की किराना व प्रॉवीजन्स दुकानों पर ईदी का सामान भी इन दिनों जोरों से विक रहा है। बाजार में तरह-तरह की सेवईयां विक्रय के लिए बाजार में उपलब्ध है। इसके अलावा युवाओं के लिए आकर्षक टोपियां सहित अन्य सामग्री भी बाजार में इन दिनों बिक्री हो रही है।

 

रोजा आपसी भाईचारे को बढ़ाता है.

रमजान में सामूहिक रोजा इफ्तार के माध्यम से अपने पास-पड़ोस के लोगों के साथ बैठने का मौका मिलता है, जिससे पारस्परिक संबंधों में प्रगाढ़ता आती है। मुस्लिम विद्वानों के मुताबिक, रोजा एक ऐसी इबादत है जिससे रोजेदार के अंदर मानवता का भाव उत्पन्न होता है और उसका शरीर निरोग एवं स्वस्थ रहता है।

रोजा खोलने के लिए कुछ विशेष निर्देश हैं, जिनका पालन करके शरीर में उपलब्ध पौष्टिक तत्वों के उचित स्तर को सुरक्षित रखा जाता है। खजूर और छुआरे में पौष्टिकता की भरमार होती है। खजूर और छुआरे से रोजा इफ्तार करना अधिक फायदेमंद समझा जाता है।