परवेज़ अख्तर/सिवान

मकर संक्रांति के बीत जाने के बाद एक बार फिर अब शहनाई गूंजेगी.खरमास के चलते शादी विवाह जैसे मांगलिक उत्सवों पर विराम लग गया था. 15 दिसंबर को सूर्य धनु राशि में आने पर मलमास के साथ ही इन पर ब्रेक लग गया था .

मान्यता के मुताबिक सूर्य के धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करने के साथ ही खरमास समाप्त हो गया . गुरुवार से हिंदुओं के सभी शुभ कार्य, जैसे शादी-विवाह, उपनयन, मुंडन और गृह प्रवेश आदि शुरू हो जाएंगे.शास्त्रों में शादी-विवाह के लिए शुभ मुहूर्त का होना बड़ा महत्व है.वैवाहिक बंधन को सबसे पवित्र रिश्ता माना गया है.इसलिए इसमें शुभ मुहूर्त का हाेना जरूरी है.पंडित उपेन्द्रदत्त मिश्र कहते है कि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शादी के शुभ योग के लिए बृहस्पति, शुक्र और सूर्य का शुभ होना जरूरी है. विगत कई वर्षों की अपेक्षा इस वर्ष मंगलकारी नक्षत्रों के राजा पुष्य का गुरु और रवि के साथ संयोग पिछले वर्षों से अधिक बन रहा है . रवि गुरु के साथ पुष्य नक्षत्र का संयोग सिद्धिदायक और शुभफलदायी होते हैं .पंडित अवधकिशोर ओझा ने बताया कि सूर्य के धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करने के साथ ही महीने भर से चला आ रहा खरमास समाप्त हो गया.खरमास के समापन के साथ ही मांगलिक कार्य का सिलसिला आरंभ हो गया है .विवाह  के शुभ लग्न व मुहूर्त निर्णय के लिए वृष, मिथुन, कन्या, तुला, धनु एवं मीन लग्न में से किन्ही एक का होना जरूरी है .वहीं नक्षत्रों में से अश्विनी, रेवती, रोहिणी, मृगशिरा, मूल, मघा, चित्रा, स्वाति,श्रवणा, हस्त, अनुराधा, उत्तरा फाल्गुन, उत्तरा भद्र व उत्तरा आषाढ़ में किन्ही एक जा रहना जरूरीहै.विवाह  माघ, फाल्गुन, वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़ एवं अगहन मास में हो तो अत्यंत शुभ होता है .

विवाह मुहूर्त

वर्ष 2020
जनवरी 16, 17,18,20,21,28,29,30
फरवरी 3,4,5,6,9,10,11,12,14,15,16,17,18,19,20,21,25,26,27
मार्च 1,2,3,7,8,10,11,12,13 (आगे मीन 

राशि का खरमास)
अप्रैल 14,15,25,26
मई 1,24,5,6,8,10,12,17,18,19,23,24
जून 9,13,14,15,,26,28 (1 जुुुलाई     देवशयनी एकादशी)

नवम्बर 25,30

दिसम्बर 1,7,8,9,11