जलालपुर(सारण)।”माता पिता मे ही सारे तीर्थ समाहित होते है और संतान के लिए माता पिता से बडा कोई तीर्थ नहीं “
उक्त बाते किशुनपुर हरपुर शिवालय में सप्त दिवसीय शिव महापुराण की कथा में रविवार को महामंडलेश्वर स्वामी इन्द्रदेव जी महाराज ने अपने प्रवचन में कही। उन्होंने ने कहा कि तीर्थों की यात्रा, धामों की यात्रा आदमी के जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण यात्रा है और जैसे ही अवसर मिले तथा संसाधन उपलब्ध हों व्यक्ति को तीर्थों की, धामों की यात्रा अवश्य करनी चाहिए किन्तु घर में माता पिता उपस्थित हैं उनका सम्मान करने, उनकी सेवा करने से इन यात्राओं का लाभ घर बैठे मिल जाता है। जिस संतान ने माता पिता की सेवा का व्रत ले लिया है, जो माता पिता का सम्मान करते हैं, सुबह सुबह उठकर अपने माता पिता की परिक्रमा करे तथा चरण वन्दना करे वह संतान अत्यंत भाग्यशाली होती है तथा उसे इस लोक के सारे सुख सहज ही उपलब्ध हो जाते हैं। शिव महापुराण की कथा की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि गणेश भगवान् ने मां के आदेश का पालन किया तो भले ही उनका सिर धर से अलग हो गया किन्तु माता पिता के आशीर्वाद से गज का सिर जोड़कर जीवन भी पाए एवं प्रथम पूजन का अधिकार भी पा लिया। भगवान् कार्तिकेय ने मोर की सवारी से ब्रम्हांड की यात्र प्रारंभ की तो भगवान् गणेश ने अपने बड़े विवेक का सदुपयोग करके अपने माता पिता की सात परिक्रमा करके भाई से छोटे होने के बाद भी पहले विवाह का अधिकार प्राप्त कर लिया और अपने विवेक से यह सिद्ध कर दिया कि माता पिता के श्रीचरणों की सेवा एवं पूजन में रहने वाली संतान को अन्यत्र की यात्रा करने की आवश्यकता नहीं है। इस प्रकार महाराज श्री ने युवा पीढ़ी से आह्वान किया कि आप अपने माता पिता को प्रसन्न रखें तो आपको सुख खोजने के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।मौके पर सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल,संत दामोदर दासजी महाराज, भारतीय ग्रामीण डाक कर्मचारी संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश्वर कुंवर, यज्ञ संयोजक भरत सिंह मुखिया संघ के अध्यक्ष तारकेश्वर सिंह, जेपी सेनानी ललनदेव तिवारी, रामकुमार सिंह, अनिल सिंह,मदन सिंह, झूलन कुंवर, जयन्ती राय,मधुसूदन दूबे मनीष तिवारी बंटी सिंह राजेश दूबे सहित दर्जनो गणमान्यो के साथ हजारों श्रद्धालु थे।