बेतिया – गौनाहा:– *शेख मुस्तफा के मौत के बाद बिखरा कई परिवार*

न्यूज इनपुट रामायण कुमार गौनाहा पं.चम्पारण बिहार :-
यू तो शेख मुस्तफा को मिनी वीरप्पन का नाम डीएफो गोलीकांड के समय मिला लेकिन उनके हाथो उनके जीवन काल में कोई गरीब व बेसहाय परिवार को सहारा मिला । उनके जीवन काल में वो परिवार कभी दुखी नही हुआ और न ही कभी किसी परिवार के पास ऐसी नौबत न आई जिससे उस परिवार के चुल्हा बंद हो जाए और उस परिवार को खाना न मिला हो । उनके जीवन काल में स्थानीय लोग सुख-चैन कि जिंदगी व्यतीत कर रहे थे । कभी किसी गरीब के बेटी की शादी हो, बेटी कि विदाई का समान की जरूरत हो या कोई अन्य समान की अवश्यकता हो बेहीचक लोग उनके दरवाजे पर पहुंच जाया करते थे और हां पहुंचने के बाद कोई कभी निराश नही लौटा उस दरबार से ।
यहां बताते चले कि सधारण परिवार से ताल्लुकात रखने वाले शेख साहब गरीबो की मदद दिल खोल कर किया करते थे । उनके इसी अंदाज से स्थानीय लोगो कायल हो गये थे । उसी का परिणामस्वरूप है कि उनके मौत के पश्चात उनके चहेते लोगो ने अपने-आप को काबू मे न कर सके और शक के दायरे में आये लोगो के घर पर तोडफोड किया ।
*शव पहुचते ही उमडा जनसैलाब* जैसे ही स्थानीय लोगो के मसीहा बन चुके शेख साहब का शव पैतृक गांव में पहुचाँ तो उनकी आखरी दर्शन के लिए गमगीन महौल मे लोगो का जन सौलाब उमड पडा । लोग रोते बिलखते नजर आये जो जहाँ था वही मायूस बैठा नजर आया । महौल पुरा गमगीन था । रोते हुऐ लोगो के बिच से अवाज आ रही थी की कैसे अब बअबी के विदाई मे सेजीया के समान दियाई । इनके अपने बल बूते पर रोजी रोटी के लिए अपनी जमीन देकर कई परिवार को सभाल कर रखे थे शेख साहब ।