फाइलेरिया मुक्त अभियान: जिला स्वास्थ्य समिति में मीडिया कार्यशाला का आयोजन

-जिले में 20 सितम्बर से सर्वजन दवा सेवन कार्यक्रम शुरू होगा: सीएस डॉ अंजनी कुमार 
-जिले को 1.48  करोड़ दवाएं प्राप्त हुई हैं: डॉ शरद चन्द्र शर्मा
-राज्यस्तर से 4542 व जिले से 530 नियुक्त पर्यवेक्षक का हो रहा प्रशिक्षण

मोतिहारी, 13 सितम्बर। राज्य स्वास्थ्य समिति के निर्देश पर सोमवार को जिला स्वास्थ्य समिति में एक दिवसीय मीडिया कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में सिविल सर्जन डॉ अंजनी कुमार ने बताया कि जिले को फाइलेरिया मुक्त बनाने के लिए 20 सितंबर से सर्वजन दवा सेवन कार्यक्रम शुरू होगा। अभियान के दौरान बच्चों व अन्य लाभार्थियों को फाइलेरिया से बचाव को आशा कार्यकर्ताओं, केयर इंडिया, व अन्य स्वास्थ्य कर्मियों के सहयोग से उनके सामने दवा खिलाई जाएगी। उन्होंने बताया कि जिले को 1 करोड़ 48 लाख 54 हजार 800 फाइलेरिया रोधी दवाएं प्राप्त हुई हैं । जिसे सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को उपलब्ध कराया जा रहा है।
पर्यवेक्षक का प्रशिक्षण कराया जा रहा
इस कार्यक्रम के लिए राज्यस्तर से कुल 4542 दवा खिलाने वाले एवं 530 पर्यवेक्षक आवंटित किए गए हैं। जिनका प्रशिक्षण कराया जा रहा है। जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ शरदचंद्र शर्मा ने बताया कि दवा के सेवन के उपरांत कुछ लोगों को अनुषंगी प्रभाव जैसे पेट दर्द उल्टी बुखार चक्कर इत्यादि होने की संभावना है परंतु इससे घबराने की आवश्यकता नहीं है। यह सामान्य लक्षण है। अगर किसी को किसी प्रकार की विशेष तकलीफ या दिक्कत होती है तो वैसे लोग जाकर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर चिकित्सक की सलाह से अपना स्वास्थ्य जांच करा सकते हैं।
जिला एवं प्रखंड स्तर पर रैपिड रिस्पांस टीम का भी गठन-
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी ने बताया कि तीन प्रकार की समस्याओं से निपटने के लिए जिला एवं प्रखंड स्तर पर रैपिड रिस्पांस टीम का भी गठन किया गया है। दवा खिलाने के लिए दो तरह से निर्देशित किया गया है। एक घर-घर घूमकर अपने सामने आशा कार्यकर्ताओं एवं स्वास्थ्य कर्मी दवा खिलाएंगे। दूसरा ग्रुप के रूप में मिलकर काम करेंगे और प्रसारित करके दवा खिलाने का कार्य करेंगे। कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए जिला एवं प्रखंड स्तर पर पर्यवेक्षण एवं अनुश्रवण को पर्यवेक्षक दल का भी गठन किया गया है।
प्रचार प्रसार एवं मोबिलाइजेशन के कार्य में पीसीआई संस्था के द्वारा सहयोग
उन्होंने बताया कि सर्वजन दवा सेवन कार्यक्रम में आम जनों को जागरूक करने को प्रचार प्रसार एवं मोबिलाइजेशन के कार्य में पीसीआई संस्था द्वारा सहयोग किया जा रहा है। डब्ल्यूएचओ एवं केयर इंडिया के द्वारा विशेष रूप से सहयोग दिया जा रहा है। बताया कि प्रचार प्रसार को  बैनर पोस्टर मार्गदर्शिका लीफलेट आदि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को उपलब्ध कराया जा रहा है। वहीं इस कार्य में मीडिया का भी सहयोग लिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि हाथीपाँव के स्वयं प्रबंधन के लिए जिला स्तर से एमएमडिपी किट तैयार कर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को हस्तगत कराया गया है। साथ ही जिला स्तर से भी प्रशिक्षण कराया जा रहा है। 
खाली पेट दवा का सेवन नहीं करें-
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी ने बताया कि  इस अभियान को सफल बनाने के लिए आशा घर-घर जाकर 2 साल से अधिक उम्र के लोगों को अपने सामने फाइलेरिया की दवा खिलाएंगी। उन्होंने बताया कि फाइलेरिया एक गंभीर रोग है जिसे फाइलेरिया की दवा सेवन से ही बचा जा सकता है। कभी-कभी फाइलेरिया के परजीवी शरीर में होने के बाद भी इसके लक्षण सामने आने में वर्षों लग जाता है। इसलिए फाइलेरिया की दवा का सेवन सभी लोगों के लिए लाभप्रद है। उन्होंने बताया लोग खाली पेट दवा का सेवन नहीं करें। बताया 2 साल से कम उम्र के बच्चे, गंभीर रोग से ग्रसित एवं गर्भवती महिला को फाइलेरिया की दवा नहीं खिलाई जाएगी।   
जिला वेक्टर जनित रोग पदाधिकारी ने बताया ऐसे खानी है दवा : 
इस अभियान में डीईसी एवं  अलबेंडाजोल की गोलियाँ लोगों की दी जाएगी। 2 से 5 वर्ष तक के बच्चों को डीईसी की एक गोली एवं  अलबेंडाजोल की एक गोली, 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को डीईसी की दो गोली एवं  अलबेंडाजोल की एक गोली एवं 15 वर्ष से अधिक लोगों को डीईसी की तीन गोली एवं  अलबेंडाजोल की एक गोली दी जाएगी।  अलबेंडाजोल का सेवन चबाकर किया जाना है।
जन-जागरूकता पर बल : 
अभियान के विषय में जन-जागरूकता बढ़ाने में जीविका, पंचायती राज विभाग एवं शिक्षा विभाग के साथ पीसीआई की अहम भूमिका है ।  जिले के सभी स्कूलों में अभियान को लेकर प्रभात फेरी के साथ प्राथना सभा में इसके विषय में बच्चों को जागरूक किया जा रहा है।
फाइलेरिया के लक्षण :
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी ने बताया कि फाइलेरिया को हाथीपाँव  रोग के नाम से भी जाना जाता है। जिसमें बुखार का आना, शरीर पर लाल धब्बे या दाग का होना एवं शरीर के अंगों में सूजन का आना फाइलेरिया की शुरुआती लक्ष्ण होते हैं। यह क्यूलेक्स नामक  मच्छर के काटने से फैलता है। आमतौर पर बचपन में होने वाला यह संक्रमण लसिका (लिम्फैटिक) प्रणाली को नुकसान पहुँचाता है| फाइलेरिया से जुडी विकलांगता जैसे लिंफोइडिमा( पैरों में सूजन) एवं हाइड्रोसील(अंडकोश की थैली में सूजन) के कारण पीड़ित लोगों को इसके कारण आजीविका एवं काम करने की क्षमता प्रभावित होती है। इस अवसर पर सिविल सर्जन डॉ अंजनी कुमार ,जिला वेक्टर जनित रोग पदाधिकारी डॉ  शरद चंद्र शर्मा, केयर  डीटीएल अभय कुमार भगत, डीपीओ  मुकेश कुमार,पीसीआई के मनोज कुमार, भिबीडीसी अभिषेक कुमार ,धर्मेन्द्र कुमार सहित ज़िले के विभिन्न मीडिया कर्मी शामिल हुए।