प्राचीन लोककला,गायकी,संस्कृति को बचाने के लिए प्रतिबध्द:युनेस्को
आजाद नेब​
भीलवाड़ा 7 मई। यूनेस्को विश्व स्तरीय लोककला सांस्कृतिक संगठन है जो हमारी प्राचीन विरासत लोककला, लोकगायकी और लोक संस्कृति को बचाने के लिए प्रतिबद्ध है। यूनेस्को की इसी नैतिक आचार संहिता के तहत हमको आगे बढ़ना होगा एवं समय-समय पर लोक सांस्कृतिक कार्यक्रमों को आयोजित कर संस्था की मूल पहचान को संबल प्रदान करना होगा। यह विचार यूनेस्को के संयोजक गोपाल लाल माली ने जिला यूनेस्को एसोसिएशन की कार्यकारिणी बैठक में व्यक्त किये। वे दिनांक 7 मई, रविवार को सायं 4 बजे बाजार नं. 3 स्थित यूनेस्को कार्यालय में कार्यकारिणी की बैठक को मुख्य अतिथि पद से बोल रहे थे। उन्होंने यह भी कहा कि भीलवाड़ा जिला यूनेस्को एसोसिएशन भी एक कार्यक्रम तैयार कर ग्रीष्म कालीन अवकाश में भीलवाड़ा जिले के तमाम युवा वर्ग को यूनेस्को द्वारा आयोजित कार्यक्रमों से जोड़कर नई पीढ़ी को अपनी विरासत से जुड़ने के लिए प्रेरित करे तो यह जिले में यूनेस्को का सार्थक कदम होगा। कार्यकारिणी बैठक की अध्यक्षता यूनेस्को के जिलाध्यक्ष अरविन्द कुमार चौधरी ने की।
एसोसिएशन के सचिव ललित अग्रवाल ने बताया कि बैठक में यूनेस्को के आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा तय करने के साथ ही ग्रीष्म कालीन अवकाश पर आयोजित होने वाले शिविर पर विचार विमर्श किया गया। यूनेस्को संगठन का विस्तार कर यूनेस्को यूथ क्लब व यूनेस्को महिला मंच का भी गठन करने का निर्णय भी बैठक में पारित किया गया। 
इस अवसर पर यूनेस्को के प्रदेश संगठन मंत्री प्रहलादराय व्यास, कार्यकारी अध्यक्ष अशोक काबरा, विद्यासागर सुराणा, पूर्व अध्यक्ष अशोक राठी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष ज्ञानेन्द्र सिंह चौधरी, चेतन मानसिंहका, जगदीशचन्द्र मून्दड़ा, कोषाध्यक्ष विशाल विजयवर्गीय, निदेशक मनीष ओस्तवाल, दिनेश अरोड़ा, राकेश जैन, सीताराम सोनी, महेन्द्र सिंघवी, संजय शर्मा, वैभव बोहरा, श्रीमती पुष्पा सुराणा, श्रीमती रेखा लोढा, सतीश बोहरा, संजय औदिच्य, गिरिराज काबरा, विनोद चौधरी, राहुल सुराणा सहित जिला कार्यकारिणी के समस्त पदाधिकारी एवं कार्यकारिणी सदस्य उपस्थित थे।