पिता के साथ रिक्शा खीचने बाली लड़की के जज्वे को सलाम,राजस्थान के 12 वीं की परीक्षा मे स्टेट मेरिट मे हासिल की छठी रैंक 
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राकेश सिंह फौजदार की रिपोर्ट 
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भरतपुर 29 मई 
 राजस्थान बोर्ड की 12वीं परीक्षा में शानदार अंकों के साथ पास होकर स्टेट मेरिट लिस्ट में छठी रैंक हासिल करने बाली राजस्थान के अलवर शहर में एक छोटे से किराए के कमरे में अपनी मां संतरा और पिता तेजाराम के पांच सदस्यों बाले परिबार के साथ रहने बाली शिवानी के जज्बे, मेहनत और लगन ने उसे पिछले दो दिनों में फर्श से अर्श पर खड़ा कर दिया है। इस होनहार बिरबांन के संघर्ष की जो कहानी सामने आई है उसे सलाम किये बिना रहा ही नहीं जा सकता क्योंकि वो जरूरत पड़ने पर अपने पिता के साथ रिक्शा खींचकर उनका सहारा बनती है तो कभी बड़ी बहन के रूप में दो छोटे भाइयों को पढ़ना-लिखना सिखाते हुए शिक्षिका बन जाती है तो कभी… मां का ख्याल रखते हुए एक कमरे के घर में ईंटों पर रखे चूल्हे पर खाना बनाते हुए घर का काम संभाल लेती है। गौरतलब है कि जीवन के तमाम अभाबो को सहते हुए कामयाबी कि मंजिल पर पहुची शिवानी के पिता तेजाराम रिक्शा चलाते हैं और मां घर पर लोगों के कपड़े सिलती हैं। तेजाराम के शिवानी सहित तीन बच्चे हैं। मां सिलाई भी उसी कमरे में करती थी। ऐसे में शिवानी न दिन में वहां पढ़ पाती थी और न रात में लेकिन ऐसे में शिवानी कमरे के बाहर बैठकर ही घंटों परीक्षा की तैयारी किया करती थी। वो कहती है कि मां सिलाई का काम करती हैं और जब बहुत थक जाती हैं तो मैं ही उन्हें चाय बनाकर पिलाती हूं। शिवानी भविष्य में आईएएस अधिकारी बनना चाहती है। शिवानी के मेरिट में आने पर इस गरीब परिवार की खुशियों को कोई ठिकाना नहीं है। शिवानी ने बोर्ड परीक्षा में 93.60 प्रतिशत अंकों के साथ स्टेट मेरिट में छठा स्थान प्राप्त किया। इस सफलता की खबर के बाद शिवानी की बस्ती में लोगों ने त्योहार जैसी खुशियां मनाई। बड़ी संख्या में आसपास के लोग शिवानी के परिवार को बधाई देने पहुंचे। मां संतरा बताती है कि शिवानी के पिता रिक्शा चलाते हैं और दिन के 150-200 रुपए बमुश्किल कमा पाते हैं। ऐसे में 2400 रुपए मकान किराए में चले जाते हैं। आर्थिक हालत ठीक नहीं है ऐसे में बह खुद कपड़े सिलती हैं लेकिन बेटी की पढ़ाई के लिए दोनों ने हर संभव कोशिश की। संतरा कहती है कि मेरी बेटी पढ़ना चाहती थी और उसकी लगन से ही वह सफल् हो पाई है। इस सफलता में उसके स्कूल के अध्यापकों की भूमिका बेहद खास है क्यों कि हम इतने पढ़े-लिखे नहीं है और जो कुछ बच्ची को पढ़ाया है इसके अध्यापकों ने ही पढ़ाया है।