• 6 लाख से अधिक बच्चों को पिलाई जायेगी पोलियो की दवा• घर-घर जाकर पिलाई जायेगी दवा
• जिलास्तर पर होगी अभियान मॉनिटरिंगछपरा /20 जनवरी 2020। शहर के राजेंद्र स्टेडियम स्थित कुष्ठ बस्ती में जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन ने पांच दिवसीय पल्स पोलिया अभियान की शुरूआत की। उन्होने नौनिहालों को जिन्दगी की दो बूंद पिलाकर इस अभियान की शुरूआत की।जिलाधिकारी ने कहा सभी 0 से 05 वर्ष तक के शत-प्रतिशत बच्चों को पोलियो की खुराक पिलायी जाय, ताकि किसी भी बच्चे को खतरनाक पोलियो बीमारी अपना शिकार न बना पाये और देश से हमेशा-हमेशा के लिए पोलियो का उन्मूलन हो जाये। उन्होंने कहा बूथों पर टीमें अपने-अपने क्षेत्र में बच्चों के टीकाकरण को लेकर सतर्क रहें, जिससे कोई बच्चा पोलियो की खुराक से वंचित न रह जाएं।रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड व ईंट भट्टों पर जाकर पिलायी जायेगी दवा:
सिविल सर्जन डॉ. माधवेश्वर झा ने बताया जिले भर में बूथ निर्धारित किये गये हैं, जहां स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं द्वारा बच्चों को दवा पिलाई जाएगी। इसके लिए आशा, आंगनबाड़ी व अन्य कर्मचारियों की टीमें बनायीं गयी हैं। बूथ दिवस से अगले दिन 20 जनवरी से 25 जनवरी तक डोर डू डोर भ्रमण कर छूटे हुए बच्चों को पोलियो की दवा पिलाई जाएगी। इसके बाद भी जो बच्चे रह जाएंगे, उन्हें 25 जनवरी के बाद बी टीम द्वारा दवा पिलाई जाएगी। रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, चैराहों पर पोलियो की दवा पिलाने के लिए ट्रांजिट बूथ बनाए गए हैं। ईंट-भट्ठों आदि पर बच्चों को तलाश कर पोलियो की दवा पिलाने के लिए मोबाइल टीम का गठन किया गया है।
0 से 5 वर्ष तक बच्चों को पिलायी जायेगी दवा:
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. अजय कुमार शर्मा ने बताया यह दवा 5 वर्ष से कम आयु के सभी बच्चों के लिए आवश्यक है। 5 वर्ष तक की आयु के बच्चों को बार-बार खुराक पिलाने से पूरे क्षेत्र में इस बीमारी से लड़ने की क्षमता बढ़ती है, जो कि पोलियो के विषाणु को पनपने से रोकती है। विभाग की पूरी कोशिश है कि पांच साल तक का कोई भी बच्चा पोलियो की दवा पीने से वंचित न रहे। इसके लिए सभी टीमों को निर्देशित किया गया है। इस मौके पर सिविल सर्जन डॉ. माधवेश्वर झा, डीआईओ डॉ. अजय कुमार शर्मा, टीबी ऑफिसर डॉ. टीएन सिंह, डीपीएम अरविन्द कुमार, डब्ल्यूएचओ के एसएमओ डॉ. रंजितेश कुमार, यूनिसेफ एसएमसी आरती त्रिपाठी, डीपीसी रमेश चंद्र कुमार, डीसीएम ब्रजेंद्र कुमार सिंह, हेल्थ मैनेजर राजेश्वर प्रसाद समेत अन्य चिकित्साकर्मी मौजूद थे।
आंकड़ों में जानिए:
लक्षित घर: 367234
लक्षित बच्चे: 601249
डोर-टू-डोर टीम: 1469
मोबाइल टीम: 43
ट्रांजिट टीम: 298
सुपरवाइजर: 544
एएनएम: 374
आशा कार्यकर्ता: 1413
आंगनबाड़ी: 1407
वोलेंटियरर्स: 937




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