नौतन:– भाईदूज भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक।

न्यूज इनपुट मदन सिंह नौतन (पं.च) बिहार:– नौतन — पुराणिक कथा मे भाईदूज की कहानी ।भगवान् सुर्य देव की संतान से जुड़ी है पुराणिक कथा मे बताया गया है यमराज, यमुना, तापी और शनि ये भगवान सूर्य की संताने कही जाती हैं। किसी कारण से यमराज अपनी बहन यमुना से वर्षों दूर रहे। एक बार यमराज के मन में हुआ कि ‘बहन यमुना को देखेने की जिज्ञासा उत्पन्न हुयी । अतः उन्होंने अपने दूतों को आज्ञा दी ।जाओ जा कर पाता करो कि यमुना आजकल कहाँ स्थित है।यमदूत विचरण करते-करते धरती पर आये किंतु उन्हें कहीं यमुनाजी का पता नहीं लगा। फिर यमराज स्वयं धरती पर मथुरा आये और विश्रामघाट पर बने हुए यमुना के महल में पहुँचे।बहुत वर्षों के बाद अपने भाई को पाकर बहन यमुना ने बड़े प्रेम से अपने भाई यमराज का स्वागत-सत्कार किया। यमराज बहन की सेवा प्रेम प्रसन्नचित्त होकर कहा मै तुम्हारी सेवा प्रेम से प्रसन्न है । भाई ने बहन को वर मांगने को कहा ।यमुना जो सभी पापो को धोती है दैवी स्वभाववाली परोपकारी आत्मा क्या माँगे? अपने लिए जो माँगता है, वह तो भोगी होता है, विलासी होता है लेकिन जो औरों के लिए माँगता है इश्वर यानि भगवान का भक्त होता है,सूर्य दिन-रात परोपकार करते हैं तो सूर्यपुत्री यमुना क्या माँगती। यमुना ने कहा कि जो भी व्यक्ति यमुना मे स्नान करे उसके सारे पाप नष्ट हो जाय । इस वचन से यमराज चिंता मे पड गये ।और सोचने लगे कि इससे सारा संतुलन ही बिगड जाएगा । भाई को चिंतित देखकर वचनो का अनादर ना हो यमुना ने कहा भैया अगर यह वरदान आपके लिए देना कठिन है तो आज नववर्ष की द्वितीया है। आज के दिन भाई बहन के यहाँ आये। या बहन भाई के यहां आये । कोई भाई बहन से स्नेह से मिले, ऐसे भाई को यमपुरी के पाश से मुक्त करने का वचन को तो आप दे सकते हो यमराज प्रसन्न हुए और बोले बहन ! ऐसा ही होगा ।पुराणिक दृष्टि से आज भी लोग बहन यमुना और भाई यम को स्मरण करके आशीर्वाद पाते हैं व यम के पाश से बचने का संकल्प करते हैं।यह पर्व भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक है। कोई बहन नहीं चाहती कि उसका भाई दीन-हीन तुच्छ हो सामान्य जीवन जीने वाला हो,आज के दिन बहने पहले अपने भाई को श्रापती है फिर भाई को जगती है श्राप मुक्त कर स्वावलंबी व दृघ आयु का वरदान देती है और बजडी खिलाकर भाई मजबूत बने रहे इसकी की कामना करती है भाई को अपने घर पाकर बहन अत्यन्त प्रसन्न होती है अथवा किसी कारण से भाई नहीं आ पाता तो स्वयं उनके घर जाकर ।
बहन भाई को इस शुभ भाव से तिलक लगाकर स्वावलंबी तथा लंबी उम्र की कामना करती है और भौजाई सदा सुहागन रहे इश्वर से प्राथना करती है आज से शुभलगन का शुभारंभ हो जाता है देहात मे लोग कहते है कि देव उठ गया ।




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