छपरा। भारतीय राजनीति में  गांधीजी के बाद जयप्रकाश नारायण ऐसे अकेले शख्सियत थे  जिन्होंने कभी भी पद की लालसा नहीं किया। मानवता एवं इंसानियत के लिए हमेशा लड़ते रहे। उनका मकसद सत्ता परिवर्तन करना नहीं था बल्कि व्यक्ति का व्यक्तित्व स्वभाव और सोच बदलें, जेपी का यही आदर्श था। जेपी कठिन सवालों के हल ढूढ़ने वाले व्यक्ति थे।उक्त बातें  लोकनायक  जयप्रकाश नारायण के  प्रथम व्याख्यानमाला के अवसर पर  जेपीयू  के सीनेट हॉल में  शनिवार को आयोजित  समारोह को संबोधित करते हुए  राज्यसभा के उपसभापति सांसद सह  मुख्य वक्ता  हरिवंश नारायण ने कही। इससे पूर्व बिहार के राज्यपाल फागू चौहान ने   वर्चुअल तकनीक के माध्यम से  एक दिवसीय व्याख्यानमाला का  विधिवत उद्घाटन किया।
जेपीयू अध्ययन केंद्र जयप्रकाश विश्वविद्यालय छपरा द्वारा  आयोजित व्याख्यानमाला में  मुख्य अतिथि  हरिवंश नारायण ने अपने संबोधन में जयप्रकाश नारायण पर आयोजित व्याख्यानमाला की प्रशंसा करते हुए कहा कि  इस तरह का आयोजन से  समाज को प्रेरणा मिलती है। उन्होंने  छात्रों को नकल करने के बढ़ावा देने  पर  रोक लगाने की वकालत करते हुए कहा कि इससे छात्रों का भविष्य बनता नहीं बन सकता,  बल्कि ज्ञान की बदौलत ही  कोई भी छात्र अपने जीवन में लक्ष्य को हासिल कर सकता है। राज सभा सांसद जयप्रकाश नारायण के  जीवन के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि  उन्होंने हमेशा चुनौतियों को स्वीकार किया।  भूदान  आंदोलन को राष्ट्रव्यापी बनाया और नागालैण्ड में आंदोलन चला कर समास्याओं को दूर कर लोगों को मुख्य धारा से जुड़ ने के लिए प्रेरित किया और इस मिशन में हद तक सफल भी हुये । मुख्य वक्ता हरिवंश नारायण ने अपने संबोधन में अभी कहा कि  जेपी के भौतिक शरीर पर उम्र का कोई असर नहीं पड़ा। आज की युवा पीढ़ी को जेपी  के जीवनी से सीख लेने व उनके  जीवनी को जानने की जरूरत है। तभी हमारा समाज सही मायने में  बदल सकता है।  सांसद ने  व्याख्यानमाला को संबोधित करते हुए यह भी कहा कि 1971 से 74 के बीच  जयप्रकाश नारायण ने 72 वर्ष की उम्र में भूदान आंदोलन को  गांव गांव ले जाने का एक नया स्वरूप दिया, नक्सलियों से आमने-सामने बात की। ये  ऐसे महापुरुष थे जिन्हें  देश  की समस्याओं को दूर करने के लिए जाने जाते थे।  राज्यसभा उपसभापति ने व्याख्यानमाला को संबोधित करते हुए कहा कि  जेपी का विचार  था कि कोई भी कार्य   धैर्य से ही हो सकता है हिंसा का रास्ता अपनाकर   कोई भी इंसान सफल नहीं हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि आज की परिवेश मे  जेपी जैसे लोग  की  कमी महसूस हो रही है,  राज्यसभा सांसद ने  वर्तमान परिवेश में छात्रों से जे पी के विचारों और उनके आदर्शों को अपनाने की  आवश्यकता पर बल दिया।
इस अवसर पर उपस्थित  जयप्रकाश फाउंडेशन के अध्यक्ष एवं बलिया के सांसद  वीरेंद्र सिंह मस्त ने व्याख्यान को संबोधित करते हुए कहा कि जीपी जैसे महान पुरुष के  जीवन से समाज को बहुत कुछ सीखने को मिलता है। भारत के इतिहास में बिहार का इतिहास उज्जवल अक्षरों में लिखा जाएगा  जिसमें छपरा का इतिहास हमेशा आजादी के महान शख्सियत को बताता रहेगा। बलिया सांसद श्री मस्त ने संबोधित करते हुए कहा कि  प्रकाश ने हमेशा मातृभूमि को बचाने और  लोकतंत्र की रक्षा के लिए तत्पर रहते थे। आंदोलन का मकसद शासन को बदलना नहीं बल्कि लोकतंत्र का सही मायने में अंतिम  व्यक्ति तकशासन महसूस  हो। सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त ने संबोधित करते हुए कहा कि  भारत कृषि प्रधान देश है,  किसी भी महामारी व अन्य परिस्थिति में आर्थिक व्यवस्था ठप  हो जाती है लेकिन  कृषि पर इसका असर नहीं पड़ता,  कृषि व्यवस्था  शक्तिशाली है।  उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि   लोकतंत्र में संवाद जरूरी है, रास्ता वहीं से निकलता है। सांसद ने इस तरह के व्याख्यान माला पर जोर देते हुए कहा कि इस तरह का आयोजन हमेशा हते रहना चाहिए। शास्त्रार से निकला  तत्व सशक्त भारत बनाने का  अस्त्र होगा। जयप्रकाश नारायण के अधूरे सपनों को पूरा करने का संकल्प लें  यही हम सबों के लिए उनके प्रति सच्चा  सम्मान होगा।कार्यक्रम के दौरान कृष्ण कुमार सिंह द्वारा रचित पुस्तक ‘परिवर्तन का पथिक’ का भी गणमान्य अतिथियों ने विमोचन किया।इस अवसर पर  अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों को प्रतीक चिन्ह एवं अंग बस देकर सम्मानित किया गया। वही   जेपी पर आयोजित एक दिवसीय व्याख्यानमाला को पदमश्री उषा कि रण खान,कुलपति फारूक अली, छपरा विधायक डॉ सीएन गुप्ता,जयप्रभा ट्रस्ट के सचिव आलोक कुमार सिंह सहित अन्य वक्ताओं ने भी संबोधित किया।  मंच का संचालन जेपी विश्विद्यालय के रजिस्ट्रार आरपी बबलू ने किया।