छपरा में वट सावित्री की पूजा कर सुहागिनी अपने पति की दीर्घ जीवन कामना की

छपरा : वट सावित्री की पूजा को लेकर छपरा पुलिस लाइन के निकट स्थित पंचवटी हनुमान मंदिर में दिखी। सैकडों की संख्याओं में महिलाओं की भीड़ अपने पति के लंबी उम्र के लिए होती है।

ये पूजा सोमवार को वट सावित्री की पूजा कर सुहागिनी अपने पति की दीर्घ जीवन और परिवार में सुख शांति और धनलक्ष्मी के लिए की।वट सावित्री में वट और साबित्री दोनों का खास महत्व है।वट या वरगद का पेड़ जिसके सम्बन्ध में पुराणों में कहा गया है कि इसमें ब्रम्हा बिष्णु और महेश का वास होता है और साबित्री इसी वट बृक्ष के नीचे पूजा कर अपने पातिब्रत के बल पर अपने मृत पति सत्यवान को नया जीवन दिलवा दिया।इस पूजा के सम्बंध में एक अन्य कहानिया है कि मारकनडेय ऋषि भगवान शिब के आशीर्वाद से बरगद के पते पर पैर का अंगूठा चूसते हुए बाल मुकुंद का दर्शन किये तभी से वट सावित्री की पूजा शुरू हुई।वट सावित्री बरत में सुहागिनी दो टोकड़ी एक मे सात तरह के अनाज लेकर उसे तो कपड़े से ढंक कर तथा दूसरे टोकड़ी में देबी साबित्री की प्रतिमा लेकर बरगद के पेड़ के नीचे बैठकर बरगद को पूजती है पूजा के तहत बरगद पर जल कूमकूम था सभी प्रकार के अनाज चढ़ाकर सूत के धागे से वरगद को बांधती है फिर सात परिक्रमा करने के पश्चात एक दूसरे को सिंदूर लगाकर पूजा सम्पन्न करती है।वट बृक्ष की पूजा से घर मे सुख शांति और धनलक्ष्मी भी आती है।वट बृक्ष को रोगनाशक भी कहा जाता है।बरगद का दूध के गम्भीर बीमारियों से रक्षा करता है।वट सावित्री की पूजा को बर्षाति पूजा भी कहा जाता है।कहा जाता है कि आज के पूजा से बर्षात के आगमन का संकेत मिल जाता है।प्रकृति में आद्रता आ जाती है।