सीवान:”अली कली मे ही बध्यो, आगे कौन हवाल” 
———-
✍विकास कु की रिपोर्ट 
———-
⏭महाराजगंज (सीवान)
चौत मास में ही प्रचंण्ड गर्मी देख पुरानी पीढ़ी के  लोग बरबस बिहारी लाल के इस दोहे “अली कली मे ही बध्यो ,आगे कौन हवाल “का उदाहरण दे डालते है ।चैत मास के शुरूवात मे ऐसी गर्मी पड़ रही है तो ज्येष्ठ मास की गर्मी लोग कैसे झेल पायेंगे ।अभी से ही डर सताने लगा है ।जनता से लेकर जानवर भी मानो गर्मी से डरे हुए हैं ।दोपहर का पारा चढ़ते ही नीलगाय, व बंन्दर गांव में प्यास बुझाने के लिए आ जा रहे है ।हालाकि लोगो ने जीवों की तो प्यास बुझाने के लिए तैयार है ।मगर भयंकर गर्मी  पड़ेगी ,इससे सहमे हुए हैं।हुआ यह कि आचानक दर्जनों बन्दर गावं मे पहुचने लगे तो लोग  समझ गये की इन जीवों को प्यास लगी है ।तभी लोगो ने जगह जगह बाल्टी मे पानी भर कर रख दिये।
         ऐसी स्थिति में अगर इन्द्रदेव खुश हो जाते है अगर वर्षा की हल्की बूंदाबांदी भी हो जाती तो प्रचंण्ड गर्मी  से तो कुछ राहत मिलती ।जंगली जानवरों से लेकर, खेती करने वाले, फलदार पौधों के लिए वरदान साबित हो सकता हैं।