
💢सीवान (09 अक्टूबर) दुनिया बदल रही है। बदलाव की इस बयार ने लोगों के नजरिए को भी बदल दिया है। कल तक जिन्हें मजबूर और असमर्थ का तमगा देकर हाशिए पर रखा जाता था, आज वो कामयाबी की नई इबारत लिख रहे है।अपने हुनर और हौसले की बदौलत उन्होंने ये बता दिया है कि वे मजबूर नहीं बल्कि मजबूत हैं। हम बात कर रहे है शारीरिक रुप से अक्षम दिव्यांगों की। काशी से पीएम नरेंद्र मोदी ने शारीरिक रुप से असमर्थ लोगों को नया नाम दिया और उनके प्रति सरकार की सहानुभूति दिखाई तो इसका असर भी अब दिखने लगा है। समाज में कई ऐसे लोग हैं जो दिव्यांगों को मुख्यधारा में लाने की कोशिश में लगे हैं।
हम चर्चा कर रहे है सीवान की स्वयंसेवी संस्था “परफेक्ट विज़न” व दिव्यांग बिन्दू कुमारी के संघर्ष व उसके बाद जीवन में बदलाव की ।
गौरतलब हो कि सीवान के गोरेयाकोठी प्रखंड मुख्यालय से कुछ की दुरी पर स्थित गाँव दुधरा बाजार में जब लगभग 22 वर्ष पूर्व महातम प्रसाद के घर एक बालिका ने जन्म लिया तो घर में खुशी के माहौल के स्थान पर मातम छा गया । मातम इसलिए नहीं छाया कि बालिका का जन्म हुआ था, मातम इसलिए छाया की बालिका पुरी तरह दोनों पैरों से दिव्यांग थी। बालिका को देखने पहुचे लोग माता-पिता को सांत्वना देकर लौट रहे थें, घर से लेकर नाते रिश्तेदारों तक में जन्म लेने बच्ची के भविष्य को लेकर चिंता थी ।
बच्ची जब बड़ी हुयी तो अन्य बालिकाओं से अलग अपने को चलने -फिरने में असमर्थ पाई । घर से लेकर बाहर तक वह दया , सांत्वना व हास्य का पात्र समझे जाने लगी । लोगों की हास्य व सहानुभूति भरी नजरें व शब्द उसके कानों व दिलो दिमाग में अब नश्तर की तरह चुभने लगे कि “यह सब भगवान की देन है तुम्हारे किस्मत में तो यहीं लिखा था ।”
शब्द – वाणों का दंश झेलते-झेलते वह बालिका अब बाईस साल युवती बन चुकी है । उसने प्रण लिया कि वह अपनी किस्मत की लकीरें बदल कर रख देगी । परिवार की माली हालत ऐसी नहीं थी कि उसे आर्थिक सहयोग मिल सके । इस बीच अप्रैल 2018 में उसे समाचार – पत्रों से ज्ञात हुआ कि नाबार्ड के सहयोग से एक स्वयंसेवी संगठन परफेक्ट विज़न द्वारा जिले में निशुल्क सिलाई -कशीदाकारी का नब्बे दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाना है । फिर उसने प्रशिक्षण कार्यक्रम में दाखिला लिया , और प्रशिक्षण पाकर आज स्वयं हुनरमंद होकर अपना जीवन ही नही चला रही है बल्कि दूसरो के लिए भी एक प्रेरणास्रोत बन चुकी है ।
ऑनलाइन मीडिया सर्विसेज ” परमार डाॅट काॅम, सीवान” के प्रतिनिधि से बात करते हुए दिव्यांग बच्ची बिन्दु कुमारी ने बताया कि प्रशिक्षण पाकर वह सीवान शहर के रामनगर में ही अपनी दो सहपाठी सहेलियों के साथ मिलकर ॐ सिलाई सेंटर की स्थापना कर ली है । जहाँ सिलाई के साथ – साथ गरीब व जरूरतमंद लड़कियों व महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के गुर सिखाये जातें हैं । उसने बताया कि पैतृक गाँव दुधरा बाजार जाने पर वहां भी सिलाई का कार्य करती है । बिंदु ने कहा की अब गाँव के लोग मुझे सहानुभूति से नहीं अपितु गर्व की दृष्टि से देखतें हैं और उदाहरण देकर अपने बच्चों को आगे बढ़ने की नसीहत देतें हैं । उसने जानकारी दी की अब वह आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर है व अपने परिजनों को भी आर्थिक मदद करती है ।
नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक मोहम्मद आफ्ताबुद्दीन ने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान मैंने पाया कि यह काफी होनहार लड़की है व इसे आगे बढ़ने की तीव्र लालसा है । वही बिन्दू को प्रशिक्षण देने वाली स्वयंसेवी संस्था परफेक्ट विज़न के सचिव मनोज मिश्र ने कहा कि शारीरिक बाधाओं व लोगों की छिटा-कसी की परवाह किये बिना बिंदु ने जिस तरह आर्थिक आत्मनिर्भता हासिल की है वह औरों के लिए प्रेरणा -स्रोत है । श्री मिश्र ने कहा की बिन्दु को आगे बढाने में हर संभव अपेक्षित मदद की जायेगी ।
✍परमार डाॅट काॅम // नवीन सिंह परमार




Recent Comments