हज कमेटी के नियमों में उलझते हिंदुस्तान के हाजी
मुकित खान ( चेयरमैन आॅल इण्डिया हज वेलफेयर सोसाइटी )
केंद्रीय हज कमेटी के आये दिन बनाये जाने वाले नये नये नियम हाजियों के लिये बड़ी उलझन पैदा कर देतें हैं.. जब से हज का काम अल्पसंख्यक मंत्रालय के हाथों में गया है तब से झूठे सब्ज़बाग तो दिखाये ही जा रहै हैं साथ ही अचानक किये जाने वाले बदलाव हज पर जाने वालों के लिये मुसीबत का सबब बनते जा रहै हैं.. कभी अचानक बताया जाता है कि हज सब्सिडी कम होने की वजह से छोटे इम्बारकेशन पर खतरे के बादल है और वे कभी भी बन्द हो सकतें हैं.. कभी सऊदी में खाना अब होटलों में ही खाने या केटरिंग की सहुलियत लिये जाने की बात कही जाती है… हज 2017 में तो हज के लिये जिन लोगों के नाम का इंतेखाब हुआ है वो समझ ही नही पा रहै कि क्या किया जाये क्या नही क्योंकि हज कमेटी की और से सही और पुख्ता मालूमात देने वाला कोई ज़िम्मेदार है ही नही।
अब ये बात उठ रही है कि जिन लोगों ने ग्रीन केटेगरी में जाने का ऑप्शन लिया है चूँकि सऊदी में सिर्फ 15000 यूनिट ही ग्रीन के लिये मिल रही है और इसमें दरख्वास्त तकरीबन 38000 आई हैं तब बहुत से लोग इस केटेगरी में जाने से महरूम हो जाएँगे और मजबूरन उन्हें अजीजिया केटेगरी में ठहरना होगा जिन लोगों ने ग्रीन के हिसाब से अपना पूरा अमाउंट जमा करा दिया है अब अगर उनकी केटेगरी अजीजिया कर दी जायेगी तो उनको डिफ़रेंस अमाउंट हज पर से आने के कई महीने बाद वापस किया जायेगा।
*ग्रीन के लिये कुरा*
अगर सऊदी की और से ग्रीन के लिये पूरी यूनिट नही दी गई तो यकीनन कुरा के चांस बनेंगे.. और ग्रीन का ऑप्शन लेने वालों को कुरा में नाम न आने कि बिना पर अजीजिया में ही जाना होगा।
ऐसा था तो हज कमेटी ये पहले ही क्लियर कर देती। केटेगरी फाइनल होने के बाद ही लोग अपना अमाउंट जमा करते.. एक तो वैसे ही लोग पाई पाई जोड़ हज के लिये जातें हैं ऊपर से हज कमेटी फायदे की बात तो दूर मुश्किलें पैदा करने से बाज़ नही आती। इधर सरकार के नये कानून (GST) ने लोगों की नींदें उड़ा रखी है। इस साल हज पर जाने वाले बहुत से लोग कारोबारी लाइन के हैं जिन्होंने अपना काम फ़िलहाल समेटा हुआ है। काम धंधो की वजह से लोग  यूँ ही परेशान है। हज कमेटी या तो ये करे कि जिनकी केटेगरी चेंज होगी और अगर उन्होंने ग्रीन के हिसाब से अपना अमाउंट जमा करा दिया है तो डिफ़रेंस की रकम उनको हज पर जाने के पहले ही दे दे ताकि उनका अमाउंट हज के दौरान उनके काम आ सके अलग से उनको इंतेज़ाम ने करना पड़े। यह हाजियों के लिये फायदेमंद कदम साबित होगा।