✍नवीन सिंह परमार
♨हर साल सर्दियां शुरू होते ही साहित्य महोत्सवों का दौर शुरू हो जाता है। जयपुर लिट् फेस्ट, दिल्ली साहित्य महोत्सव और रेख़्ता जैसे बड़े साहित्यिक आयोजनों में देश भर से हज़ारों लोग जुटते हैं एवं साहित्य का जश्न मनाते हैं। इन सभी नामी-गिरामी साहित्यिक महोत्सवों के बीच एक ऐसा महोत्सव भी है जो की भोजपुरी भाषा उत्थान के लिए कार्यरत है। जी हाँ हम बात कर रहे हैं हिंदी इलाके के अनोखे देसज साहित्यिक-सांस्कृतिक संस्था आखर के द्वारा आयोजित भोजपुरियां स्वाभिमान सम्मलेन की।

सीवान जिले के रघुनाथपुर प्रखंड में स्थित पंजवार गाँव में होने वाला ये वार्षिक सम्मलेन देश-दुनिया के अलग-अलग कोने में बसने वाले भोजपुरीभाषियों के लिए किसी मेले से कम नहीं होता। प्रतिवर्ष देशरत्न राजेंद्र प्रसाद की जयंती पर आयोजित होने वाले इस सम्मलेन को भोजपुरिया जगत में एक विशिष्ट दर्जा प्राप्त है। 3 दिसंबर को होने वाले इस सम्मलेन का इस बार नौवां आयोजन होगा जिसमे हर बार से अधिक भोजपुरी साहित्य, संस्कृति प्रेमियों के शामिल होने की संभावना है। हर वर्ष के आयोजन के साथ सम्मलेन और समृद्ध होते जा रहा है।


आखर कल्चरल ट्रस्ट की शुरुआत कुछ भोजपुरीभाषी युवाओं ने सोशल मीडिया पर की थी। देश-दुनिया के अलग-अलग कोने में स्थित इन युवाओं ने भोजपुरी भाषा और संस्कृति उत्थान को लेकर संवाद की शुरुआत की जिसने आगे चलकर एक सांस्कृतिक मंच का रूप ले लिया। समय के साथ आखर तरक्की करता गया और प्रिंट और ई पत्रिका का भी प्रकाशन किया।
प्रतिवर्ष सम्मलेन की शुरुआत गौरवयात्रा से होती है, जिसमे पंजवार गाँव एवं आसपास के इलाकों से आये हज़ारों छात्र-छात्राएं अपनी भाषा भोजपुरी के गौरव का उद्घोष एवं भाषा बचाने की अपील करते हैं। हर वर्ष गौरवयात्रा में छात्र-छात्राओं की बढ़ती हिस्सेदारी साफ़ तौर पर देखी जा सकती है।






इस बार के सम्मलेन में गौरवयात्रा के बाद विभिन्न आयोजन होंगे जिसमें सबसे पहले यात्रा में शामिल बच्चे अपनी प्रस्तुति देंगे और इसके बाद दीप प्रज्वलन के साथ सम्मलेन एवं साहित्यिक-सांस्कृतिक सभा का शुभारम्भ होगा। पंजवार के प्रभाप्रकाश डिग्री कॉलेज के पास बने विशाल सभागार में ही सारे आयोजन होंगे। भोजपुरी के मशहूर कलाकार भरत सिंह भारती लिविंग लीजेंड के तौर पर उपस्थित रहेंगे एवं उन्हीं के द्वारा वार्षिक कैलेंडर का लोकार्पण होगा। आखर ने तीन वर्ष पहले वार्षिक भोजपुरिया कैलेंडर को प्रकाशित करने की शुरुआत की थी। इस कैलेंडर में 12 साहित्यिक एवं सांस्कृतिक लोगों को शामिल किया जाता है जिन्होंने अपने कला की बदौलत भोजपुरी के स्तम्भ को और मज़बूत करने में अहम् भूमिका निभायी है। इन 12 लोगों में 11 दिवंगत लोग होते हैं और हर साल एक लिविंग लीजेंड को शामिल किया जाता है। पहले और दूसरे वर्ष के कैलेंडर में क्रमशः शारदा सिन्हा एवं भरत शर्मा व्यास लिविंग लीजेंड की भूमिका में थे जबकि इस वर्ष भरत सिंह भारती को लिविंग लीजेंड के तौर पर शामिल किया गया है। बाकी के ग्यारह नाम जो वार्षिक कैलेंडर की शोभा बढ़ाएंगे, वो हैं- उदय नारायण तिवारी, दुर्गाशंकर प्रसाद सिंह ‘नाथ’,रसूल मियां (रसूल अंसारी),मनोरंजन प्रसाद सिंह,पद्मश्री रामेश्वर सिंह ‘कश्यप’, रघुवंश नारायण सिंह,शिव प्रसाद ‘किरण’,गीतकार- शैलेन्द्र,मैनावती देवी “मैना”,बिजेंद्र अनिल, प्रभुनाथ सिंह के नाम शामिल है ।
कैलेंडर लोकार्पण के बाद सेमिनार एवं टॉक शो का आयोजन किया जाएगा जिसमे प्रो वीरेंद्र नारायण यादव, डॉ जौहर शाफिआबादी, डॉ अर्जुन तिवारी, हृषिकेश सुलभ, ध्रुव गुप्त, डॉ मुन्ना पांडेय, गुरुचरण सिंह, जैसे साहित्यकार भाग लेंगे। युवा साहित्यकारों में रोहित सिंह, गरिमा रानी, आशुतोष पांडेय आदि महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। सत्र के दूसरे चरण में डॉ सुभाषचंद्र यादव, ध्रुव गुप्त, व तंग इनायतपुरी जैसे मशहूर कवियों के साथ एक कवि सम्मलेन का आयोजन किया जाएगा। कवि सम्मलेन के साथ साहित्यिक सत्र समाप्त होगा एवं महाविद्यालय के बच्चों की प्रस्तुति होगी।
शाम छः बजे सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत होगी ।इस सत्र में मशहूर बॉलीवुड अभिनेता पंकज त्रिपाठी खास मेहमान के रूप में उपस्थित रहेंगे। इस सत्र में मशहूर रंगकर्मी सह रंग निर्देशक संजय उपाध्याय, मशहूर लोकगायिका विजया भारती की खास उपस्थिति रहेगी व इनकी विशेष प्रस्तुति होगी। इन वरिष्ठ कलाकारों द्वारा संध्या सत्र का शुभारंभ होगा। और फिर एक से बढ़कर एक कलाकारों की प्रस्तुति होगी. नेशनल स्कूल आॅफ ड्रामा से पासआउट और मुंबई में रह रहे शानदार कलाकार राकेश कुमार खास लौंडा नाच की प्रस्तुति देंगे। मशहूर नृत्य गुरु विपुल नायक अपनी टीम के साथ भोजपुरी गीतों के साथ शास्त्रीयता का मिलान कराते हुए विशिष्ट गीतों पर नृत्य की प्रस्तुति करेंगे। अपनी गायकी से लगातार विशेष छाप छोड़नेवाली और हाल ही में नीदरलैंड में आयोजित अन्तराष्ट्रीय फोक फेस्टिवल में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए सबको मुग्ध करनेवाली गायिका सुश्री चंदन तिवारी, मशहूर युवा गायक शैलेंद्र मिश्र जैसे कलाकार विशिष्ट प्रस्तुति देंगे. यह साल मनोरंजन प्रसाद सिन्हा रचित कालजयी गीत ‘फिरंगिया’ के शताब्दी वर्ष का है तो संजय उपाध्याय द्वारा फिरंगिया का गायन होगा। यह साल भोजपूरी के मशहूर गीतकार मोती बीए के जन्मशताब्दी वर्ष का भी है। चन्दन तिवारी द्वारा उनके गीतों के गायन के जरिये उनका जन्मशताब्दी वर्ष मनाया जाएगा।साथ ही गोरखपुर की युवा गायिका अंकिता पंडित व पंजवार गांव की ही गायिका निरूपमा सिंह की खास प्रस्तुति होगी। पंजवार गांव के ही रहनेवाले बांसुरी वादक मुरारीजी व कस्तूरबा इंटर कॉलेज में संगीत के शिक्षक संजय कुमार व संगीत गुरु विनय कुमार सिंह की भी खास प्रस्तुति इसी सत्र में होगी। सीवान जिले में संगीत की धारा को निरंतर गति देनेवाले गुरूद्वय अवधेश पांडेय व रमैया पांडेय की युगलबंदी भी देखने को मिलेगी ।इन कलाकारों के साथ ही शैलेंद्र शर्मा व्यास, जेआर जायसवाल,श्रद्धा सिंह सिसोदिया जैसे कलाकार अपनी प्रस्तुति देंगे। इन सारे आयोजनों के लिए पंजवार में विशेष प्रकार की मंच सज्जा की जा रही है । आखर की आरा टीम ने भोजपुरिया चित्रकारी का प्रयोग कर मंच के बैकग्राउंड को विशिष्ट रूप में तैयार किया है । इस बार के सम्मेलन का खास आकर्षण भोजपुरी लोकचित्र कला की प्रदर्शनी भी है। समारोह का समापन इस साल दिवंगत हुए भोजपुरी के चार लोगों के ऊपर आधारित श्रद्धांजलि गीत से होगा। लोकेगायिका चन्दन तिवारी द्वारा तिश्ता शांडिल्य, मनीषा राय,संजीव मिश्र व मोतीलाल मंजुल को श्रद्धांजलि दी जाएगी।
सीवान के पंजवार गांव में तीन दिसंबर को आयोजित होगा नवां भोजपुरियां स्वाभिमान सम्मेलन




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